हिंसक वन्यप्राणी व मानव संघर्ष की घटनाएं चिंताजनक

हिंसक वन्यप्राणी व मानव संघर्ष की घटनाएं चिंताजनक

prabha shankar | Publish: Aug, 13 2018 09:00:00 AM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

अधिकारियों ने बताई जागरुकता की दरकार

छिंदवाड़ा. जिले में पिछले एक साल के दौरान हिंसक वन्यप्राणी तेंदुआ, बाघ और जंगली सूकरों के आबादी क्षेत्र में आने और ग्रामीणों के साथ उनके संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। इससे बच्चे, युवा और किसानों को अपनी जानगंवानी पड़ी तो वहीं कुछ को लम्बे समय तक इलाज कराना पड़ा। इससे वन्यप्राणियों के प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति में कमी आई है।
वर्ष 2017 से अब तक देखा जाए तो दक्षिण वनमण्डल के अंतर्गत खुटामा के समीप गांव में रात में मां के साथ सो रही बालिका को तेंदुआ घसीट ले गया था, जिसका इलाज लगातार कराना पड़ा। दूसरी सबसे बड़ी घटना इसी साल जनवरी-फरवरी और मार्च में छिंदी के समीप मोहलीमाता, बिजोरीपठार और खुलसान में हुई। जब चार मासूम बच्चे तेंदुआ का निवाला बन गए। बड़ी मशक्कत के बाद तेंदुआ को पकडक़र सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भेजना पड़ा। चौरई के समीप बफर जोन के गांव कोना पिंडरई में 11 मई को एक ग्रामीण केवल पिता सुरखा बाघ का शिकार बना। कुछ दिन पहले पांढुर्ना के हिवरासेनाडवार में जंगली सूकर ने हमला कर एक किसान को मौत के घाट उतार दिया। इन घटनाओं में मृत्यु के बाद इन गांवों में लम्बे समय तक दहशत का माहौल रहा। वन विभाग ने मुआवजे से भरपाई कर दी लेकिन वन्यप्राणी और मानव संघर्ष की घटनाओं को टालने के उपाय नहीं किए। इससे इन प्राणियों के प्रति समाज में संवेदनशीलता कम हुई है। इस पर वन विभाग को पहल करनी चाहिए।

इधर पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन की कुंभपानी रेंज के गांवों में बाघ की दहशत ने ग्रामीणों की रात की नींद उड़ा दी है। दो दिन पहले इस वन्य प्राणी ने दो गायों पर हमला बोल दिया था। तब से ग्रामीण खेत जाने से डर रहे हैं। वन विभाग ने गश्ती बढ़ा दी है।

लगातार जागरुकता की जरूरत
बाघ, तेंदुआ समेत अन्य वन्य प्राणियों की संख्या लगातार बढ़ी है। उनकी मौजूदगी के प्रति गांवों में लगातार जनजागरुकता की जरूरत है। तभी उनका और मानव के बीच संघर्ष टल पाएगा। विभाग हर सूचना पर संवेदनशीलता के साथ काम करता है।
डॉ.किरण बिसेन, डीएफओ, पश्चिम वनमण्डल

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