सम्पूर्ण टीकाकरण लापरवाही...21 फीसदी बच्चों को नहीं लगे टीके, जानें वजह

- बीसीजी, पेंटावैलेंट और मीजल्स में पिछड़े, जिले में 79 फीसदी बच्चों को लगाया जन्म के 24 घंटे के भीतर लगने वाला टीका

By: Dinesh Sahu

Updated: 12 Jan 2021, 11:31 AM IST

छिंदवाड़ा/ जन्म से लेकर पांच वर्ष तक बच्चों को लगाए जाने वाले टीके में भी विभागीय अमला गंभीर नहीं है। स्थिति यह है कि जन्म के चौबीस घंटे के भीतर लगने वाले जीरो डोस भी शतप्रतिशत नहीं लगाए गए है। इतना ही नहीं बीसीजी, पेंटावैलेंट और मीजल्स को लेकर भी उपलब्धि संतोषजनक नहीं है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सामने आए आंकड़ों से यह दावा किया जा रहा हैं।

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार जिले में पूर्ण टीकाकरण 68 फीसदी बच्चों का किया गया हैं, जिसमें सबसे कम स्थिति पांढुर्ना तथा सबसे बेहतर हर्रई विकासखंड की बताई गई है। चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक जन्म के चौबीस घंटे के भीतर बच्चों को पोलियो, हेपेटाइटिस-बी तथा बीसीजी का टीका अनिवार्य रूप से लगना चाहिए, अन्यथा शिशु के विकास में कई तरह की बाधाएं और बीमारी होने की आंशका बन जाती है।


इस काम आता है यह टीका -


पेंटावैलेंट - शिशु और बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की वजह से यह टीका लगाया जाता है। यह टीका बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता को रोगों से लडऩे के लिए समक्ष बनाता है।


हेपेटाइटिस-बी - हेपेटाइटिस-बी एक प्रकार का संक्रमण है, जो कि रक्त और शरीर के तरल पदार्थों से फैलता है। इस टीके के लगने से लीवर कैंसर जैसी जटिलताओं से सुरक्षा मिलती है।


बीसीजी - यह टीका 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को लगाया जाता है। इससे टीबी के संक्रमण से सुरक्षा मिलती है।


मीजल्स-रूबेला टीका - खसरा रोग के निर्मूलन तथा रूबेला को नियंत्रित करने के लिए यह टीका लगाया जाता है। खसरा एक जानलेवा रोग है, जो कि वायरस की तरह फैलता है।


यह है जिले की स्थिति - (सभी टीकाकारण की उपलब्धि प्रतिशत में है।)


विकासखंड जीरो डोस बीसीजी पेंटावैलेंट मीजल्स रूबेला
अमरवाड़ा 93 106 84 91
बिछुआ 94 99 75 83
चौरई 99 100 83 88
छिंदवाड़ा 66 77 63 69
हर्रई 97 99 88 93
जुन्नारदेव 83 97 81 92
मोहखेड़ 10 106 83 87
पांढुर्ना 83 99 54 57
परासिया 96 88 71 80
सौंसर 89 99 79 80
तामिया 43 68 79 85

होम डिलेवरी होने से बनती है स्थिति -


जीरो डोस जन्म के चौबीस घंटे के भीतर लगने चाहिए, पर कई मामलों डिलेवरी घर पर होने से या बच्चों में जन्मजात विकृति होने से उक्त टीके नहीं लग पाते है।


- डॉ. एलएन साहू, जिला टीकाकरण अधिकारी छिंदवाड़ा

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