यहां फंस गए नेताजी..जानिए क्या है माजरा

उनके विरोधी सक्रिय हो उठे और पार्टी आलाकमान तक इसकी रिपोर्ट पहुंचा दी।

By: manohar soni

Published: 11 Sep 2017, 12:05 PM IST

छिंदवाड़ा. पांढुर्ना नगरपालिका उपाध्यक्ष चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी के पार्षदों में फूट क्या पड़ी, इससे यहां के एक बड़े नेता अचानक निशाने पर आ गए। उन्हें ही इस इलाके में पार्टी का मुख्य चेहरा माना जाता है। इसके चलते उनके विरोधी सक्रिय हो उठे और पार्टी आलाकमान तक इसकी रिपोर्ट पहुंचा दी। अब उनसे ही पूछताछ हो रही है कि आखिर एेसा क्या हुआ, जब कुर्सी के लालच में अनुशासन को ताक पर रख दिया गया। पार्टी को एकजुट रखने में उन्होंने क्या कदम उठाया। इन सवालों के जवाब जिम्मेदार ‘नेताजी’ ने दिया या नहीं, ये तो वे जाने लेकिन ‘शाह युग’ की पार्टी में उनके परफारमेंस अंक कटना तय हो गए हैं।


प्रकृति से हो गया ‘प्रेम’
जंगल पर पेड़ पौधों पर ‘अनुसंधान’ करते-करते एक मैदानी अफसर को कुछ इस तरह ‘प्रेम’ हो गया कि मामला घर
तक पहुंच गया और परिवार बिखरने की नौबत बन गई। अब लाखों रुपए कमाने के बाद भी घर और मन में शांति-सुकून गायब है। इस महकमे के कार्यालयीन बाबू और भृत्य अपने ‘साहब’ की इस खबर को चटखारे लेकर खजरी चौक के पान ठेलों पर खूब सुना रहे हैं। सिर पर सफेदी आने के बाद भी ‘दिल’ के धडक़ने के इस लिफाफे का मजनून जानने के लिए लोग बेचैन हैं तो वहीं प्रतिक्रिया भी जंगल में आग की तरह फैल रही है।


कैसे बने बात
सहकारिता क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी उहापोह की स्थिति बन रही है। सरकार ने समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदी न करने का फैसला लिया है। एेसे में उनके काम वैसे ही कम हो जाएगा। दूसरी तरफ संगठन में भी दो फाड़ होते दिख रहे हैं। संगठन कर्मचारियों की मांगों को लेकर शासन प्रशासन तक ज्ञापन दिए जा रहे हैं, इधर कर्मचारी ही एक नहीं हो रहे हैं। एेसे में संगठन की स्थिति हास्यास्पद हो रही है। बताया जा रहा है जो अभी प्रभार संभाल रहे हैं उन्हें भी कोई पसंद नहीं कर रहा है। कुल मिलाकर मामला गड़बड़ है।


आखिरी समय गड़बड़ाया गणित
केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू किया। पार्टी के फर्माबदारों ने अच्छाइयां गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन अचानक एेसा झटका लगा कि अब भाई लोग मुंह बना रहे हैं। नए नियमों को लेकर कई निर्माण कार्य रोक दिए गए। ये समय पर पूरे हो जाते तो कई चेहरों पर मुस्कुराहट दौड़ जाती, क्यों कहने नहीं समझने की बात है लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता। कुछ विभागों में समितियों का कार्यकाल अंतिम चरण में है, एेसे में वहां कुर्सी सत्ताधारी दल के नेता अब जीएसटी को मन ही मन कोसने में लगे हैं क्योंकि खुलकर तो बोल नहीं सकते।
मनोहर सोनी, संदीप चवरे

BJP
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