घरेलू प्रसव पर नहीं विभाग का नियंत्रण, जानें वजह

- प्रशासन और चिकित्सा के निर्देशों का नहीं हो पा रहा पालन

By: Dinesh Sahu

Published: 18 Dec 2020, 02:52 PM IST

छिंदवाड़ा/ संस्थागत और सुरक्षित प्रसव के लिए लोगों को प्रेरित कराने में चिकित्सा अमला नाकाम साबित हो रहा है। जिले में सबसे ज्यादा स्थिति आदिवासी अंचल की है। इसकी वजह समय पर परिवहन, चिकित्सा सेवाएं, योजनाओं का लाभ आदि नहीं मिल पाना बताया जाता है। प्रशासन और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने पिछले दिनों बैठक लेकर घरेलू प्रसव पर नियंत्रण लगाने और संस्थागत प्रसव के लिए लोगों को प्रेरित करने के निर्देश दिए थे।

इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। स्थिति यह है कि माह जनवरी से अक्टूबर 2020 के बीच 438 घरेलू प्रसव हुए, जिनमें सबसे अधिक जुन्नारदेव और तामिया विकासखंड के दर्ज किए गए है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक छिंदवाड़ा और सौंसर क्षेत्र में सबसे अधिक संस्थागत प्रसव हुए है।


गर्भपात में पीछे नहीं मामला -


अनचाहा गर्भधारण करने के मामले में भी जिला पीछे नहीं हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार पिछले दस माह में 545 मामले गर्भपात के दर्ज किए गए, जिनमें सबसे अधिक जिला अस्पताल के आंकड़े है। बताया जाता है कि वैधानिक प्रक्रिया के बाद ही गर्भपात की प्रक्रिया पूरी की जाती है।


आंकड़ों पर डाले नजर -


ब्लाक घरेलू प्रसव गर्भपात की संख्या


अमरवाड़ा 35 10
बिछुआ 18 10
चौरई 06 71
छिंदवाड़ा 00 204
हर्रई 42 21
जुन्नारदेव 183 32
मोहखेड़ 04 43
पांढुर्ना 29 37
परासिया 20 44
सौंसर 00 44
तामिया 101 29

COVID-19
Dinesh Sahu
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned