कागज में नहीं साहब, हकीकत में बढ़ाइए पेड़ों का कारवां

पिछले वर्ष 21 लाख पौधे लगाए थे, इस बार 31 लाख का लक्ष्य, विभाग का दावा 85 फीसदी पौधे जीवित, लेकिन हकीकत कुछ और

By: manohar soni

Published: 01 Jul 2019, 12:00 PM IST

छिंदवाड़ा. हर वर्ष की तरह कैलेण्डर की तारीख में एक जुलाई को वन महोत्सव मना लिया जाएगा। इस दिन से सरकारी-गैरसरकारी क्षेत्र में पर्यावरण संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए खाली पड़ी जमीनों पर पौधरोपण शुरू हो जाएगा। अब तक इस परम्परा को निभाने से परिणाम संतोषजनक नहीं रहे हैं। केवल रिंग रोड के बदहाल प्लांटेशन की तस्वीर को देखकर मैदानी हकीकत को समझा जा सकता है।
वन विभाग के आंकड़े ही देख लिए जाएं तो लगेगा हर वर्ष पौधों को लगाने से लेकर पर्यावरण के क्षेत्र में जिला तरक्की कर रहा है। पिछले वर्ष 2018-19 में पूरे छिंदवाड़ा वन वृत में 21.06 लाख पौधों को लगाने का दावा किया गया और उसमें
पौधों की जीवितता 85 प्रतिशत बताई गई है।

हकीकत...
रिंग रोड के सूखे पड़े प्लांटेशन एक उदाहरण है। जिला मुख्यालय के नजदीक सीएम कमलनाथ के मॉडल जिले पर यह एक धब्बा है। दुख यह है कि यह तस्वीर सामने आने पर भी सत्तासीन व्यवस्था से लेकर पूरी प्रशासनिक तंत्र गहरी नींद में हैं।

इस पर आंकड़ों का खेल देखिए...
वर्ष 2019-20 में बिगड़ते मौसम चक्र और पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए वन विभाग पहले से ज्यादा 31 लाख पौधे लगाएगा। यह सर्व विदित है कि पौधों के पेड़ बनने की यात्रा में उसे सालभर खाद-पानी देने तथा देखभाल की जरूरत पड़ती है। इस सेवा को देने के लिए कोई कर्मचारी तैयार नहीं है। इसके बिना वन महोत्सव कैसे सार्थक हो सकेगा? यह सवाल बना हुआ है।

आंकड़ो में वन विभाग का प्लांटेशन
मंडल वर्ष 2018 2019 का लक्ष्य
पूर्व 699304 1247495
पश्चिम 1233465 1518743
दक्षिण 173254 374439
कुल 2106023 3140677
नोट-वन विभाग के तीन डिवीजन में 2018 में 1183 हेक्टर क्षेत्र में 21 लाख पोधो को लगाने का दावा किया गया है। इनमे से पोधो की जीवितता का प्रतिशत 85 प्रतिशत बताया गया है। वर्ष 2019 में 31.40 लाख पौधों को रोपने का लक्ष्य रखा गया है।

 

श्रमदान की हरियाली देखनी हो तो आइए धरमटेकड़ी
वन महोत्सव में पौधों को आंकड़ों में लगाने में सरकारी तंत्र की लापरवाही जगजाहिर है, लेकिन जनभागीदारी के साथ सेवा में ईमानदारी के प्लांटेशन देखना हो तो धरमटेकड़ी पहुंचना होगा, जहां पौधों को लगाने से लेकर उनकी देखभाल समाजसेवियों ने सम्भाली। मॉर्निंग ग्रुप के सदस्यों ने साईं मंदिर के पास एक छोटे से प्लांटेशन को वृक्षों का आकार दे दिया। आम, जामुन, आंवला, बेल, अनार जैसे न जाने कितने फलदार पौधों को अपने श्रम से पेड़ बना दिए। बारिश के बाद ठण्ड से गर्मी तक पहाड़ी पर एक किमी पैदल चलते कुप्पी से पानी लेकर पौधों को सींचा। यह परम्परा आज भी निभाई जा रही है। इसे प्लांटेशन तैयार करने का मॉडल उदाहरण माना जा सकता है।

पत्रिका ने चलाया ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ अभियान
मई-जून में तापमान का औसत 46 डिग्री हो जाने पर पूरे शहर के समाजसेवियों और पर्यावरण विदों ने चिंता व्यक्त की और इसका कारण नेशनल हाईवे निर्माण में काटे गए 2.15 लाख पेड़ों को बताया गया। इसे देखते हुए पत्रिका ने घर से कचरे के रूप में निकलने वाली आम की गुठलियों को जमीन में लगाने का अभियान चलाया। अब तक परिणाम सार्थक रहे हंै। यह जिले में हरियाली बिखेरने का छोटा सा प्रयास है। आगे पौधरोपण से लेकर उसकी देखभाल और उसे पेड़ बनाने के संकल्प से कारवां बढ़ाना होगा।

Patrika
manohar soni Reporting
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