‘आज नहीं चेते तो भावी पीढ़ी नहीं करेगी माफ’, जानें वजह

अपशिष्ट प्रबंधन पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन

By: Rajendra Sharma

Published: 03 Mar 2019, 08:18 AM IST

छिंदवाड़ा. हम अपने आत्मकेंद्रित स्वार्थों में खोए हैं। यदि अपशिष्ट कुप्रबंधन की सनक से हम नहीं चेते तो भावी पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। यह बात विशेषज्ञों ने शासकीय पीजी कॉलेज में शनिवार को कही। अपशिष्ट प्रबंधन पर तीन दिनी राष्ट्रीय सेमिनार के आखिरी दिन इस विषय के विशेषज्ञों ने यह बात कही। हिंदू विश्वविद्यालय बनारस के प्रोफेसर डॉ. राजीव प्रताप सिंह ने देशभर से आए शोधार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अपने हिस्से की सफाई ख़ुद करें और इसकी आदत डालें। अपशिष्ट कुप्रबंधन की सनक से अगर हम नहीं उबरे तो भावी पीढ़ी हमें माफ नहीं करेंगी। सिंह ने कहा कि सरकार अपने स्तर से प्रयास करें और हम अपने स्तर पर। उन्होंने कहा कि जिनकी हम पूजा करते हैं उनकी हमने क्या हालत कर डाली है। आरजीपीवी भोपला के डॉ. अमित विश्वकर्मा ने आगाह किया कि अपशिष्ट कुप्रबंधन की जड़ें हमारे आत्मकेंद्रित स्वार्थों में निहित हैं।
पैनल डिस्कशन में डॉ. वीपी सिंह ने मानव की उपभोक्तावादी प्रवृत्तियों, डॉ. मनीष ठाकुर ने कानूनों के लागू होने में ढील, श्यामलराव ने पर्यावरण स्वच्छता के प्रति जनमत की उदासीनता, मेजर राकेश श्रीवास्तव ने व्यक्तिगत स्तर पर सुधार करने, डॉ. विकास द्विवेदी ने गंदगीजनित बीमारियों के कारणों, संजय सुम्पाराव ने रॉ मैटेरियल के समुचित प्रबंधन, डॉ. संध्या शर्मा ने अपशिष्ट को कम करने व अनिल वर्मा ने सुधार अपने घर से शुरू केरने पर बल दिया। डॉ. संध्या शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में राष्ट्रीय स्तर के वक्ताओं के मार्गदर्शन से हुए फायदों से सबको अवगत कराया।
डॉ. यूके जैन ने कार्यशाला की सफलता के लिए किए गए प्रयासों के लिए प्राणीशास्त्र विभाग को बधाई दी। डॉ. अमर सिंह ने पैनेल चर्चा सत्र का संचालन करते हुए कार्यशाला में विभिन्न निष्कर्षों से अवगत कराया। कार्यशाला संयोजक डॉ. मीना स्वामी ने सभी का आभार मना। इस मौके पर विभाग के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। गीत, नृत्य के साथ जंगल का कानून नाटक का मंचन भी किया गया।

Rajendra Sharma Desk
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