अनोखी होली : न उड़ता है रंग और गुलाल, फिर भी इकट्ठा होता है पूरा शहर

अनोखी होली : न उड़ता है रंग और गुलाल, फिर भी इकट्ठा होता है पूरा शहर
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Sandeep Chawrey | Publish: Mar, 12 2017 06:11:00 PM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

देर रात तक मनाते हैं उत्साह

छिंदवाड़ा. होली पर रंगों की फुहारों में हर कोई भीगना चाहता है। स्नेह, सद्भाव, सभी को मिलजुलकर रहने का संदेश देते इस पर्व पर हर कोई इस मस्ती में रहता है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में होली विभिन्न स्वरूपों में मनाई जाती है और लोग इस पर्व को पूरा आनंद उठाते हैं। 

धुरेड़ी के दिन एक जगह एेसी भी है जहां होली मिलन के लिए पूरा शहर इकट्ठा होता है। शाम को तय समय पर सभी एक जगह इकट्ठा होते हैं और फिर देर रात तक इस पर्व का उत्साह मनाते हैं अपनी तरह से। छिंदवाड़ा में होता है यह आयोजन और फहारे होती है काव्य की। हास्य, वीर, श्रृंगार, करुण रस के कवि साहित्यकार गीत, गजल,कविताओं, शेर-ओ शायरी, मुक्तक, छंद आदि से काव्य की फुहारों से लोगों को भिगोते हैं और मिलजुलकर सभी आनंद उठाते हैं।

62 साल से हो रहा आयोजन
भारतीय संस्कृति में पर्व सामाजिक मिलन और समरसता के उदहारण रहे हैं। इसी सोच को लेकर शहर के समाजसेवी और शिक्षाविद स्व प्रतुलचंद द्विवेदी ने इस आयोजन की शुरुआत आज से 62 वर्ष पहले 1955 से की थी। छोटी सी काव्यगोष्ठी के साथ इस आयेाजन की शुरुआत हुई। 

धुरेड़ी के दिन होने वाले इस आयोजन को लोगों ने पसंद किया और यह आयोजन लगातार हर वर्ष होते गया। कवि साहित्यकार जुड़ते गए और आज देशभर में छिंदवाड़ा का यह कवि सम्मेलन बेहद प्रसिद्ध हो गया है।

कहीं और नहीं होता धुरेड़ी पर एेसा आयोजन
देश में छिंदवाड़ा एेसा इकलौता शहर है जहां धुरेड़ी के दिन इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन होता है। अपने आप में यह अनूठा आयोजन होता है जिसमें देशभर के नामी कवि इस मंच को साझा करते हैं। इस साल सम्मेलन का 63वां आयेाजन है और यह अब स्व द्विवेदी को समर्पित कर दिया गया है।

यहां के कवि सम्मेलन में अब तक 1 हजार से ज्यादा कवि यहां आकर कविताओं का पाठ कर चुके हैं। कुछ कवियों को तो यह मंच इतना पसंद आया कि वे कईं बार यहां आ चुके हैं।

बच्चों से लेकर बूढे़ सभी एक साथ
धुरेंड़ी के दिन पूरा शहर रंग और भंग की तरंग में देर रात तक भीगा रहता है लेकिन शाम होते ही पूरा शहर एक जगह इकट्ठा होने लगता है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग सभी आयोजन स्थल पर एकत्रित होने लगते हैं। 

रात आठ बजे से सम्मेलन शुरू होता तो है लेकिन बंद होता है उस समय तक जब तक यहां बैठी शहर की जनता और कवि प्रेमी श्रोता चाहें। ये बात भी महत्वपूर्ण है कि ज्यादातर लोग पूरे परिवार के साथ यहां आते हैं और कवि सम्मेलन का आनंद उठाते हैं। सालों से हो रहे इस कवि सम्मेलन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में यहां उपस्थित रहतीं हैं।

सोमवार को इस बार आयोजन में ये आएंगे कवि
2017 में इस बार सोमवार 13 मार्च को धुरेड़ी के दिन यह कवि सम्मेलन दशहरा मैदान में आयोजित होना है। इस बार इंदौर के सत्यनारायण सत्तन, लखनऊ के वेदव्रत वाजपेयी, सहारनपुर के डा नवाज देवबंदी, बारा राजस्थान के सुरेंद्र यादवेंद्र, इंदौर की डा भुवन मोहनी, गाजियाबाद के बलवीरसिंग खिचड़ी, मुंबई के सुनील व्यास कविता पाठ करेंगे। 

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