जिला और जलाशय के नाम पर पांढुर्ना के हाथ खाली

पांढुर्ना को जिला बनाने की मांग वर्षों से हो रही है। पिछले तेरह वर्षों से कामठीकलां जलाशय निर्माण को लेकर हलचल होती रही, लेकिन दोनों ही मुद्दों पर पांढुर्ना के हाथ आज भी खाली हैं। जिला बनाने और कामठीकलां जलाशय निर्माण की मांग को लेकर शहर में जोर-शोर से हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है । दोनों ही मांगे जल्द पूरी हो इसलिए अभियान को लोगों का प्रतिसाद भी मिल रहा है।

By: Rahul sharma

Updated: 11 Oct 2021, 12:19 PM IST

छिन्दवाड़ा/ पांढुर्ना. पांढुर्ना को जिला बनाने की मांग वर्षों से हो रही है। पिछले तेरह वर्षों से कामठीकलां जलाशय निर्माण को लेकर हलचल होती रही, लेकिन दोनों ही मुद्दों पर पांढुर्ना के हाथ आज भी खाली हैं। जिला बनाने और कामठीकलां जलाशय निर्माण की मांग को लेकर शहर में जोर-शोर से हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है दोनोंही मांगे जल्द पूरी हो इसलिए अभियान को लोगों का प्रतिसाद भी मिल रहा है। गौरतलब है कि पूर्व में पांढुर्ना जिला बनाओ समिति ने मुख्यमंत्री की सभाओं में पहुंचकर जिला बनाने की मांग जोर शोर से की थी। वर्ष 2008 से लेकर 2014 तक समिति सक्रिय रही थी। इसके बाद जिला बनाओ संघर्ष समिति ने इस मुद्दे को लेकर जन जागरूक अभियान चलाया। फिलहाल हम फाउंडेशन द्वारा इन दोनों मुद्दों पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। शहर में भले ही जिला बनाने के लिए लोगों को जुटाया जा रहा है लेकिन शासन स्तर पर यह मांग ठंडे बस्ते में है। जब छिंदवाड़ा को संभाग बनाने की घोषणा की गई थी तब से पांढुर्ना को अलग जिला बनाने की मांग ने जोर पकड़ा था। शासन स्तर पर इसके लिए कई बार जानकारी मांगी गई। कांग्रेस शासन में कमलनाथ सरकार ने स्थानीय प्रशासन से प्रस्ताव मांगा था लेकिन तब भी घोषणा नहीं हो सकी। भाजपा नेता कामठीकलां जलाशय बनाने की बात कर रहे हो लेकिन शासन स्तर पर इसे निरस्त करने के बाद से आज तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। कांग्रेस सरकार ने इसे निरस्त कर दिया था। जबकि वर्ष 2008 में मुख्यमंत्री ने मंच ने इसके निर्माण की घोषणा की थीं। बाद में नल चुनाव चिह्न लेकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज कर नगर पालिका अध्यक्ष बने प्रवीण पालीवाल के कार्यकाल में डेम निर्माण की राशि मिली, टेंडर भी हुए लेकिन कोई नतीजा नहीं निकाला। आज भी जनता पेयजल के लिए तरस रही है।

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