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MP Election 2023: ऐसी विधानसभा सीट जहां लगातार तीसरी बार कोई नहीं जीता

locationछिंदवाड़ाPublished: Nov 25, 2023 10:25:17 am

Submitted by:

Manish Gite

parasia chunav result 2023-परासिया विधानसभा क्षेत्र में अब तक नहीं बनी हैट्रिक, तीसरी बार भाग्य आजमा रहे सोहन, ज्योति की अग्निपरीक्षा, छह विधायक ऐसे जिन्हें दो-दो बार मिला मौका

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विधानसभा चुनाव 2023 के लिए मतदान संपन्न हो चुका है। अब चौक-चौराहों पर बस जीत और हार की चर्चा चल रही है। किस विधानसभा से कौन जीतेगा, किसकी हैट्रिक लगेगी, किसकी सरकार बनेगी। तीन दिसंबर को मतगणना का दिन है। इस दिन शाम तक तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी। परासिया विधानसभा में कांग्रेस हैट्रिक की ओर है तो वहीं भाजपा की अग्निपरीक्षा है। यहां अब तक किसी भी पार्टी ने हैट्रिक नहीं लगाई है।

वर्ष 1980 तक लगातार कांग्रेस के विजयी अभियान को वर्ष 1985 के चुनाव में रोकने वाले भाजपा के डॉ. रामजी मस्तकार की हैट्रिक महज 406 वोटों के अंतर से चूक गई थी। कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने के बाद परासिया की राजनीतिक पिच पर डॉ. रामजी मस्तकार ने अंगद की तरह पैर जमा लिया। पहला चुनाव उन्होंने 4 हजार 336 वोटों से जीता था। इसके बाद उनके कार्यों को देखते हुए वर्ष 1990 के विधानसभा चुनाव में भी मतदाताओं ने प्यार लुटाया।

इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस से दो बार विधायक रह चुके दामोदर पाटिल को 9303 मतों के बड़े अंतर से हराया था। दो बार लगातार विधायक की कुर्सी पर जनता ने उन्हें बैठाया। अब बारी थी हैट्रिक की। वर्ष 1993 के चुनाव में उनकी कांगे्रस के हरिनारायण डेहरिया से काटे की टक्कर देखने को मिली। महज 406 वोटों के अंतर से हरिनारायण विधायक बन गए। इसके बाद भाजपा ने उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया।

वर्ष 2013 से लगातार कांग्रेस से सोहनलाल वाल्मिक जीत का झंडा गाड़ रहे हैं। वे कांग्रेस से तीसरी बार विधायक का चुनाव लड़ रहे हैं और उनकी हैट्रिक की बारी है। हालांकि इस बार भाजपा ने यहां से ज्योति डेहरिया को टिकट देकर बड़ा दांव खेला है। अब यह देखना है कि परासिया के मतदाता किसे अपना आशीर्वाद देते हैं।

दो-दो बार का ही रिकॉर्ड

परासिया विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं ने अब तक किसी विधायक को तीसरा मौका नहीं दिया है। परासिया का चुनावी इतिहास देखें तो वर्ष 1957 से 2018 तक के विधानसभा चुनाव में छह विधायक ऐसे रहे हैं जिन्हें परासिया के मतदाताओं ने दो-दो बार मौका दिया है, लेकिन तीसरी बार जब वे फिर मैदान में उतरे तो उन्हें नकार दिया।

डाक मतपत्रों ने पलटी थी बाजी

परासिया विधानसभा में वर्ष 2008 में कांग्रेस के सोहन वाल्मिक और भाजपा के ताराचंद बावरिया के बीच हुए मुकाबले में डाक मतपत्रों ने बाजी पलटकर रख दी थी। पहले सामान्य मतों की गणना के बाद कांग्रेसियों ने खुशियां मनानी शुरू कर दी थी, लेकिन डाक मतपत्रों की पेटी खुली तो ताराचंद बावरिया आगे निकल गए। महज 93 वोटों के अंतर से भाजपा सीट बचा पाई थी।

सामान्य थी परासिया सीट

मध्यप्रदेश के गठन के बाद परासिया विधानसभा सीट सामान्य थी। वर्ष 1957 के विधानसभा चुनाव में सामान्य सीट पर कांग्रेस के काशी प्रसाद ने जीत दर्ज की थी। वह दो बार कांग्रेस से विजयी रहे। तीसरी बार उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी शांतिस्वरूप से हार का सामना करना पड़ा। एक साल बाद वर्ष 1963 में परासिया ने उपचुनाव देखा। सामान्य सीट का यह आखिरी चुनाव था, जिसमें कांग्रेस के सेवकराम दुबे ने जीत हासिल की थी।

कब कौन रहा परासिया से विधायक

वर्ष 1957-काशी प्रसाद(कांग्रेस)
वर्ष 1958-काशी प्रसाद(कांग्रेस)
वर्ष 1962-शांति स्वरूप(निर्दलीय)
वर्ष 1963-सेवकराम दुबे(कांग्रेस उपचुनाव)
वर्ष 1967-बारीकराव अमृतराव(कांग्रेस)
वर्ष 1972-बारीकराव अमृतराव (कांग्रेस)
वर्ष 1977-दामोदर पाटिल(कांग्रेस)
वर्ष 1980-दामोदर पाटिल (कांग्रेस)
वर्ष 1985-रामजी मस्तकार(भाजपा)
वर्ष 1990-रामजी मस्तकार(भाजपा)
वर्ष 1993-हरिनारायण डेहरिया(कांग्रेस)
वर्ष 1998-लीलाधर पुरिया(कांग्रेस)
वर्ष 2003-ताराचंद बावरिया(भाजपा)
वर्ष 2008-ताराचंद बावरिया(भाजपा)
वर्ष 2013-सोहनलाल वाल्मिक-(कांग्रेस)
वर्ष 2018-सोहनलाल वाल्मिक-(कांग्रेस)

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