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Politics: सीएम के दौरे में दिखी चुनावी रंजिश की झलक

locationछिंदवाड़ाPublished: Dec 09, 2023 11:25:09 am

Submitted by:

prabha shankar

- भीतरघात व हार की कड़वाहट नहीं निकाल पा रहे मन से
- हर विधानसभा में गुटबाजी से ग्रस्त पार्टी

Party suffering from factionalism in every assembly
Party suffering from factionalism in every assembly

छिंदवाड़ा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं को भले ही पराजय का गम भूलकर लोकसभा चुनाव की तैयारी करने की सीख दे गए हो लेकिन हर विधानसभा में टिकट से लेकर भीतरघात और हार की कड़वाहट बरकरार है। सत्ता में वापसी के बाद भी उम्मीदवार और उनके समर्थक बगावती को अंदरुनी रूप से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। पूरी पार्टी गुटबाजी से ग्रस्त दिख रही है।

एक दिन पहले आए सीएम के सामने भी हर विधानसभा से एक-दूसरे के खिलाफ शिकवा-शिकायतों का दौर जारी रहा। हर कहीं ये आवाज...ये नेता भीतरघात नहीं करता तो हम जीतते भैया तो कहीं से गद्दारों को पार्टी से निकालो सुनाई दी। जिला मुख्यालय में ये हाल रहा तो हर विधानसभा क्षेत्र में क्या स्थिति होगी, जहां मैदानी कार्यकर्ता हर दिन हमेशा आमने-सामने हो रहे हैं। एक-दूसरे को देखते ही उन्हें चुनाव में भीतरघात, प्रतिद्वंदी की अंदरुनी मदद, दुष्प्रचार जैसे वाकये याद आ जाते हैंं। कई बार बहस में इसका उल्लेख भी हो रहा है। परिणाम आने के बाद भी चुनावी रंजिश समाप्त नहीं हो पा रही है। भाजपा संगठन को भी अंदरुनी शिकायतें हो रही है। कहीं से यह दिखाई नहीं दे रहा है कि पार्टी गुटबाजी से उबर नहीं पा रही है।


टिकट से चार विधानसभा में दिखी थी नाराजगी
भाजपा ने इस बार पांढुर्ना, चौरई और अमरवाड़ा से नए चेहरों को टिकट दी। इससे पुराने नेता-कार्यकर्ता पूरे चुनाव भर असंतुष्ट की भूमिका अदा करते रहे। कहीं से भी चुनाव प्रचार नहीं किया। उल्टे विपक्ष के साथ भीतरघात भी किए। जुन्नारदेव में भी असंतोष दिखाई दिया। छिंदवाड़ा और परासिया विधानसभा में भी पार्टी इस समस्या से ग्रस्त दिखाई दी। पुराने नेता चुनाव में सक्रिय नहीं दिखाई दिए। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और अहं भावना इतनी हावी रही कि उम्मीदवारों को पराजय का सामना करना पड़ा।


लोकसभा चुनाव सामने, कैसे आगे बढ़ेगी पार्टी

सातों विधानसभा हारने के बाद भी पार्टी नेता-कार्यकर्ता एक दूसरे की शिकवा-शिकायतें संगठन स्तर पर कर रहे हैं। उनके मन में चुनावी रंजिश का भाव है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि लोकसभा चुनाव अप्रेल में होने हैं। यदि पार्टी में एकता नहीं रही तो सीएम के छिंदवाड़ा लोकसभा सीट को हासिल करने का लक्ष्य कैसे पूरा हो पाएगा। इसका जवाब कोई भी नेता आपसी मनमुटाव में खोज नहीं पा रहा है।

6.55 प्रतिशत वोट से हारी भाजपा
सातों विधानसभा क्षेत्र के चुनाव नतीजों को देखा जाए तो कांग्रेस को 48.35 प्रतिशत वोट मिले। इससे छिंदवाड़ा से कमलनाथ समेत सात कांग्रेस उम्मीदवार निर्वाचित हो गए। भाजपा को 41.79 प्रतिशत मत पर संतोष करना पड़ा। कांग्रेस ने 6.55त्न वोट अधिक हासिल कर पार्टी को पटकनी दे दी। लोकसभा चुनाव में पार्टी करीब 95 हजार वोट की रिकवरी कर सकी तो ही कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे सकती है।

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