Paryushan parv: पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की हुई आराधना, गुरुदेव ने दिया यह ज्ञान

स्वाध्याय भवन गोलगंज में पं. सुदीपकुमार जैन ने कही।

By: ashish mishra

Published: 15 Sep 2021, 10:21 AM IST


छिंदवाड़ा. अगर आपको संसार सागर का परिभ्रमण करते हुए थकान हुई हो अथवा दुख लग रहा हो और सुखी होना चाहते हों, तो सच्चे सुख को प्रदान करने वाली मां जिनवाणी का स्वाध्याय करें। यह बातें दशलक्षण पर्व पर स्वाध्याय भवन गोलगंज में पं. सुदीपकुमार जैन ने कही। महापर्व के पंचम दिवस पर सकल दिगम्बर जैन समाज के साथ मुमुक्षु मण्डल एवं अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के श्रावक-श्राविकाओं ने धर्म के पांचवें लक्षण उत्तम सत्य धर्म की आराधना कर उसका स्वरूप जाना और 1008 पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया। बुधवार को सकल समाज धर्म के छठवें लक्षण उत्तम संयम धर्म की मंगल आराधना करेगा। स्वाध्याय भवन में चल रहे मंगल प्रवचनों में गुरुदेव ने कहा कि जानने वाले को जानना अर्थात् हमारी आत्मा को जानना इसी का नाम सत्य धर्म है। बाहरी पदार्थों को जान लिया और जो जानने वाला है उसको नहीं जाना इसका नाम झूठ है। दया, दान, व्रत, भक्ति आदि के भाव सब पुदगल के भाव हैं। अपने को जानने में जो आनंद है, वह पर को जानने में तीन काल में नही आ सकता। इंदौर से पधारे युवा विद्वान अक्षत शास्त्री ने कहा कि सत्य धर्म मात्र सत्य बोलने का नाम नही है अपितु सतस्वभावी निज शुद्धात्मा का श्रद्धान ज्ञान करना यही वास्तविक सत्य धर्म है। कोई भी वस्तु तीन काल में कभी भी असत्य नही हो सकती, मात्र हमारा तत्सम्बन्धी ज्ञान और वाणी में असत्यता आती है। हमें वस्तु में नही स्वयं में सुधार करना है। वस्तु तो जैसी है वैसी ही रहेगी। यह जीव वस्तु में सुधार चाहता है इस कारण दुखी है। यह जीव हंस-हंस कर पाप बांधता है और फिर रो-रो कर भोगता है। अत: जिन्हें सुखी होना हो वे वस्तु में नही अपने में सुधार करें और यह सुधार का मार्ग मां जिनवाणी बताती है। समय निकाल कर जिनवाणी का स्वाध्याय अवश्य करें।

ashish mishra Desk
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