Patalakot: कोदो-कुटकी की ब्रांडिंग हो तो बदल सकती है तस्वीर

बिचौलियों के हाथों बेच देते हैं भारिया आदिवासी, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर सरकारी प्रोत्साहन की जरूरत

By: prabha shankar

Published: 26 Dec 2020, 06:02 PM IST

छिंदवाड़ा/छिंदी। आदिवासियों के प्रिय भोजन कोदो-कुटकी में उपलब्ध पोषक तत्वों को देखते हुए इसकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जाए तो न केवल क्षेत्रीय किसानों को बेहतर मूल्य दिलाया जा सकता है, बल्कि छिंदवाड़ा की इस पहचान को भी देश-विदेश के नक्शे में स्थापित किया जा सकता है। यह गूंज इस समय तामिया-पातालकोट से उठ रही है।
देखा जाए तो पातालकोट के 12 गांवों में भारिया आदिवासी इस फसल को प्रमुखता से लगाते हैं और इसका उपयोग सामान्यत: अपने भोजन में करते हैं। इस उपज में इतने पोषक तत्व हैं कि कड़ी मेहनत करने के बाद भी इस वर्ग को स्वस्थ देखा जा सकता है। कोदो-कुटकी पातालकोट के अलावा तामिया, हर्रई, जुन्नारदेव और अमरवाड़ा मेंं होती है। इस पूरे क्षेत्र में यह उपज आदिवासी 15-20 रुपए में बिचौलियों को उपलब्ध करा देते हैं। फिर बाजार में यह उपभोक्ताओं को 40 रुपए किलो में उपलब्ध होती है।
पातालकोट के युवा दिलीप कुमार कुरमिया कहते हैं कि कोदो कुटकी की उपज की सहीं ब्रांडिंग और मार्केटिंग हो जाए तो इसे प्रदेश और राष्ट्रीय बाजार में पहुंचाया जा सकता है। इसके साथ ही इस उपज के पोषक तत्वों को भी समझाने की आवश्यकता है। डोंगरा निवासी समेत उइके और चिमटीपुर के आसलाल का भी यहीं कहना है कि कोदो कुटकी के सेवन से कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। फिलहाल इसे बाजार में सहीं मार्केटिंग की नीति के साथ उतारा जा सकता है।

निर्यात संवर्धन समिति करें विचार तो बने बात
हाल ही में कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने जिला निर्यात संवर्धन समिति की वर्चुअल बैठक ली थी और एक जिला एक उत्पाद के चयन के लिए जिले में अपनी अलग पहचान बनाने वाले उत्पादों के सुझाव मांगे थे। कृषि क्षेत्र में गेहूं, धान व कपास, उद्यानिकी क्षेत्र में आलू, संतरा, धनिया व टमाटर, औद्योगिक क्षेत्र में फ्रट्स एंड वेजिटेबल पॉउडर, फे्रब्रिक, सौंसर सिल्क, चिरोंजी, कस्टर्ड एप्पल, वुडन फर्नीचर के नाम सामने आए थे। इस उत्पाद चयन में कोदा-कुटकी पर विचार किया जा सकता है। इसकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग के उपाय किए जा सकते हैं।

इनका कहना है
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम में न्यूटीशियल के लिए कोदो कुटकी के प्रमाणित बीज किसानों को दिए जा रहे हैं। इसकी खेती को बढ़ावा देना कृषि विभाग के लक्ष्य में शामिल है।
-जेआर हेडाऊ,उपसंचालक कृषि।

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