Patalkot's unique Diwali: बाजार में खरीदारी की नहीं, लोक नृत्य की होड़

पूरा गांव एकत्र होकर मनाता है खिरका, भारिया परिवार गोवर्धन समेत देवी-देवताओं को देते हैं बधाइयां

By: prabha shankar

Updated: 13 Nov 2020, 05:54 PM IST

छिंदवाड़ा/छिंदी. जिला मुख्यालय से 75 किमी दूर सतपुड़ा की वादियों में बसा पातालकोट अपने रहस्यमयी भौगोलिक स्थिति के लिए जितना मशहूर है, उतना ही अपनी प्राचीन सांस्कृतिक परम्परा के लिए। भारिया बहुल इन गांवों में खुशियों का अर्थ है उत्सव। एक दिन बाद जब दीपावली त्योहार मनेगा तो पूरे गांव नाचते-गाते हुए झूम उठेंगे। कुल देवता समेत देवी लक्ष्मी की पूजा होगी और लोग एक-दूसरे को बधाइयां देंगे।

शहरी जनजीवन से दूर इन 12 गांवों में शैक्षणिक और सडक़ सम्पर्क सुविधा पहुंच जाने से पहले से अधिक जागरुकता आई है। अब लोग अपनी लोक संस्कृति के बारे में खुलकर बात करने लगे हैं।

इनका कहना है
दीपावली उनके लिए एक उत्सव है। इस पर्व पर देवी-देवताओं की पूजन के साथ वे पारम्परिक लोक नृत्य गेड़ी करते हैं। फिर पूरा गांव एकत्र होकर एक-दूसरे को त्योहार की बधाइयां देता है। पटाखे भी फोड़े जाते हैं।
आसलाल, ग्राम चिमटीपुर

दीपावली पर पहले घरों में गोवर्धन स्थापित करते हैं। फिर रम और सेताम नाम से लोक नृत्य होता है। इसके बाद पूरा गांव एकत्र होता है,जहां खिरका नाम का कार्यक्रम होता है।
दिलीप कुमरिया, ग्राम रातेड़

खरीदी की होड़ उनकी परम्परा नहीं
इनके मुताबिक इस त्योहार में सामग्री खरीदी की होड़ उनकी परम्परा नहीं है। अभाव में भी लोक संस्कृति से जुडकऱ त्योहार की खुशियां महसूस की जा सकती है। पातालकोट में इस पर्व का जितना आनंद आता है, उतना शायद ही कहीं आता होगा। पातालकोट के गांवों के झीनूलाल कुरमिया, मोहलिया, सूरज लाल, मंगल, सोराधी, कमल शा और मेहताप शाह भी उत्साहित हैं। उनके अनुसार दीपावली सबसे बड़ा त्योहार है। मजदूर परिवार बाहरी जिलों से मजदूरी कर लौटते हैं तो नए कपड़े और पारम्परिक पकवान के साथ त्योहार उमंग और उत्साह से मनाते हैं। यह परम्परा उन्हें बुजर्गो से मिली है, उसे निभाते चले आ रहे हैं।

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