मरीजों को नसीब नहीं स्टे्रचर, कर्मचारी ढो रहे सामग्री

Dinesh Sahu | Publish: Aug, 12 2018 12:19:48 PM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

जिला अस्पताल : स्वास्थ्य सेवाएं गरीबों के लिए बन गई मजाक

छिंदवाड़ा. जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं गरीबों के लिए मजाक साबित हो रहीं हैं। एक तरफ प्रशासन और प्रबंधन उचित सेवाएं प्रदान करने का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ अव्यवस्थाओं की तस्वीरें उनकी पोल खोल रही हैं। एेसा ही एक मामले जिला अस्पताल में देखने को मिला है। दरअसल, उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को समय पर न तो स्टे्रचर मिलता है और न ही डॉक्टर या वार्ड तक ले जाने वाले वार्डब्वॉय।

 

किसी तरह स्टे्रचर मिल भी जाए तो परिजन को ही खींचकर डॉक्टर के पास मरीज को ले जाना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ विभाग के ही कर्मचारी मरीजों के उपयोग में लाए जाने वाले स्टे्रचर पर सामग्री ढोते हैं। इस कार्य में अक्सर दो-तीन कर्मचारी लग जाते हैं। इसी तरह वार्डों से निकलने वाले चादर व अन्य सामग्री को भी स्ट्रेचर या व्हील चेयर से लाने-ले जाने में कर्मचारी लगते हैं। एेसा नहीं है कि जिम्मेदारों को इसकी जानकारी नहीं होती, लेकिन जब तक कोई शिकायत न करे वह भी मामले को गम्भीरता से नहीं लेते हैं।


उपचार की उम्मीद लेकर दूर-दराज से आने वाले मरीजों को प्रबंधन उचित स्टे्रचर भी मुहैया नहीं करा पाता है। परिजन टूटी-फूटे स्टे्रचर पर ही मरीज को ले जाते हंै। बता दें कि एेसा ही एक मामला हाल ही देखने को मिला था। इसके बाद प्रबंधन ने व्यवस्था बनाने का दावा तो किया, लेकिन हकीकत में फर्क नहीं पड़ा।


जगह पर नहीं छोड़ते कर्मचारी


विभागीय अधिकारियों का नियंत्रण अपने ही कर्मचारियों पर नहीं है। यही वजह है कि कर्मचारी मनमानी बरतते हैं। १०८ एंबुलेंस से मरीज आने पर कर्मचारी रास्ता बदल लेते है या फिर एक-दूसरे पर टालते हैं। कई तो यूनिफार्म में नहीं होने से पहचाने में भी नहीं आते हैं। वहीं सामग्री छोडऩे के बाद स्टे्रचर मूल जगह पर भी रखकर नहीं आते हैं। एेसे में जब लोगों को इसकी जरूरत पउ़ती है तो वे भटकते रहते हैं। मर्चुरी के पास खड़े तीन-तीन स्टे्रचर इस बात की पोल खोलते हैं।

Ad Block is Banned