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District Hospital: मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही का खमियाजा भुगत रहे मरीज

सिरदर्द बनी एमआरआइ मशीन, तापमान मेंटेन न होने पर फिर हुई खराब, नागपुर में जांच के लिए देने पड़ रहेे दस हजार रुपए

छिंदवाड़ा

Published: May 16, 2022 11:04:51 am

जिला अस्पताल: मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही का खमियाजा भुगत रहे मरीज

सिरदर्द बनी एमआरआइ मशीन, तापमान मेंटेन न होने पर फिर हुई खराब, नागपुर में जांच के लिए देने पड़ रहेे दस हजार रुपए

छिंदवाड़ा। मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध जिला अस्पताल की एमआरआइ मशीन का संचालन एक बार फिर बंद हो गया है। इस बार कारण तापमान मेंटेन न होने का बताया गया है। प्रभारी चिकित्सक भी 15 दिन के अवकाश पर चली गई हैं। इसके चलते सम्बंधित मरीजों को जांच के लिए नागपुर में दस हजार रुपए देने पड़ रहे हैं।
अस्पताल सूत्रों की मानें तो एमआरआइ स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों और मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धमनियों के ब्लॉकेज और जेनेटिक डिस्ऑर्डर का पता लगाने में होता है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने अपने ट्रस्ट से करीब छह करोड़ रुपए की यह मशीन बुलाकर मेडिकल कॉलेज को दान में दी थी। कॉलेज प्रबंधन इस मशीन का प्रबंधन शुरुआत से ही सम्भाल नहीं पाया। कुछ माह इंदौर के निजी चिकित्सक डॉ. दीपेन्द्र वर्मा से इसकी रिपोर्टिंग कराई, फिर उनके चले जाने पर संचालन बंद हो गया। डॉक्टर के चले जाने पर डॉ.शिपिंग जैन को इसका कार्यभार दिया गया। तब भी मशीन में कुछ न कुछ गड़बड़ी के चलते ये कामयाब नहीं हो सकी। अब तापमान में मेंटेन की समस्या आ रही है।

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नागपुर में सुविधा, एमआरआइ जांच में ज्यादा खर्च
एमआरआइ जांच की सुविधा केवल नागपुर और भोपाल में है। ऐसे में अस्थिरोग से जुड़े डॉक्टर मरीजों को एमआरआइ जांच कराने लिखते हैं तो मजबूरी में उन्हें नागपुर जाना पड़ता है। इस जांच समेत इलाज का खर्च दस हजार रुपए आता है। आउटसोर्सिंग एजेंसी को नहीं दे रहे संचालन अस्पताल के चिकित्सक पहले ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को एमआरआइ मशीन का संचालन आउटसोर्सिंग एजेंसी को देने का सुझाव दे चुके हैं लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पाया है। डीन डॉ.जीबी रामटेके इस बारे में कोई जवाब देने को तैयार नहीं हैं।


इनका कहना है
जिला अस्पताल में तापमान में मेंटनेंस की समस्या के चलते एमआरआई मशीन का संचालन बंद पड़ा है।
-डॉ.शिखर सुराना, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल।

सेंट्रोफ्यूज मशीन अस्पताल पहुंची, मरीजों को मिलेगी राहत
अस्पताल के पैथालॉजी सेंटर में सेंट्रोफ्यूज मशीन पहुंच गई है। सम्बंधित तकनीशियन के आने पर इसे इंस्टॉल कराया जाएगा। इससे ब्लड प्लाज्मा और प्लेटरेट बनाने की समस्या का समाधान हो जाएगा। मरीजों को प्राइवेट में महंगा शुल्क नहीं देना पड़ेगा, बल्कि अस्पताल में ही सुविधा मिल जाएगी। गौरतलब है कि फरवरी माह में मशीन बिगडऩे पर अस्पताल प्रबंधन ने इसे खरीदने का निर्णय लिया था। उसके बाद इस मशीन को खरीदने केऑर्डर दिए गए। सिविल सर्जन के मुताबिक यह मशीन आ गई है।

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