Personality Development Guidance : "शिक्षा जन्मजात व अर्जित शक्तियों की जननी है": डॉ. कामना वर्मा

चांद कॉलेज में 'विद्यार्थी जीवन, शिक्षा मनोविज्ञान व व्यक्तित्व विकास' पर व्याख्यानमाला आयोजित

By: Rajendra Sharma

Updated: 03 Dec 2019, 11:08 AM IST

छिंदवाड़ा/ चांद कॉलेज में विद्यार्थी जीवन, शिक्षा मनोविज्ञान व व्यक्तित्व विकास विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता बतौर बोलते हुए कन्या महाविद्यालय छिंदवाड़ा की प्राचार्य व मनोविज्ञान की प्राध्यापिका डॉ., कामना वर्मा ने कहा कि व्यक्ति की जन्मजात व अर्जित शक्तियों का वातावरण के साथ समायोजन ही व्यक्तित्व विकास है। संतुलित व्यक्तित्व विकास वाले विद्यार्थी हमेशा प्रतिकूल परिस्थितियों में उत्तम समायोजन, सुदृढ़ इच्छाशक्ति, स्वयं की कमियों की समझ रखने वाले व विकास की ओर निरंतर गतिशील रहने वाले होते हैं। आत्मजागरूकता, आत्मनियंत्रण, आत्मावलोकन,अभिप्रेरणा, सहानुभूति, असीम धैर्य व मनोविश्लेषणात्मक प्रखर बुद्धि वाले होते हैं। राजनीति विज्ञान की डॉ. पम्मी चावला ने कहा कि अभिप्रेरणा कार्य करने की सतत ऊर्जा प्रदान करती है तथा आत्म गौरव, आत्मप्रतिष्ठा एवम् अवचेतन मन केंद्रित ऊर्जा का भंडार होती है। शिक्षा हमारे अंदर बुद्धि निर्माण करके समस्या समाधान की समालोचनात्मक क्षमता जाग्रत करती है। शिक्षा व्यक्ति के अंदर अन्तर्दृष्टि, तर्कशक्ति, अधिगम, अनुकरण, कौशल सीखने की ललक, कार्यात्मक प्रतिबद्धता व निर्णय लेने की क्षमता जैसे गुणों को विकसित करने की संज्ञानात्मक संरचना विकसित करती है। भूगोल के प्राध्यापक डॉ. डी.डी. विश्वकर्मा ने कहा कि शिक्षा शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक गुणों के विकास व नियोजन की काबिलियत है जो अंतर्निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति में सहायक होती है। यह अंदर से बाहर निकलने की चेतना होती है जो हमारे व्यवहार में उत्कृष्टता, रचनात्मक, कलात्मक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण निर्मित करने की मनोवृत्ति का निर्माण करती है।

इतिहास की प्राध्यापिका डॉ. बिंदिया महोबिया ने कहा कि शिक्षा आत्मनिर्भरता बनाने, सामाजिक स्वीकृति बढ़ाने, नकारात्मक संवेगों का दमन करने एवं विश्वसनीय चरित्र निर्माण का बेहतरीन साधन है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. अमर सिंह ने कहा कि शिक्षा काल्पनिक चिंतन, विवेकपूर्ण समाधान और परीक्षण करके सीखकर व्यवहार में वांक्षित परिवर्तन की जननी है। शिक्षा मानव में नैतिकता, नेतृत्व, प्रबल इच्छा, व उपचारात्मक ज्ञानात्मक अधिगम का अंतहीन स्रोत है। डॉ. डी. के. गुप्ता ने कहा कि बिना शिक्षा के मस्तिष्क व आत्मा का पूर्ण विकास संभव नहीं है। शिक्षा जिज्ञासा पैदा करके सीखने में गत्यात्मक तीव्रता, प्रगतिशील विकास व क्षमता संवर्धन की कुंजी है। व्याख्यानमाला में प्रो. रजनी कवरेती, डॉ. आर. के. पहाड़े, डॉ. योगेश अहिरवार, प्रो. चंद्रशेखर उसरेठे, प्रो. प्रदीप पटवारी एवं प्रो. प्रकाश नागले ने भी अपने विचार रखे।

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