पेट्रोल-डीजल ने रोकी रफ्तार, हजारों हुए बेरोजगार

prabha shankar

Publish: Oct, 13 2017 11:58:29 (IST)

Chhindwara, Madhya Pradesh, India
पेट्रोल-डीजल ने रोकी रफ्तार, हजारों हुए बेरोजगार

महंगा होने के कारण कई लोग केरोसिन मिक्स कर वाहन चला रहे हैं, इससे ईमानदारी से व्यापार करने वाले ट्रांसपोर्टर्स की मुश्किलें बढ़ गई

 

छिंदवाड़ा/ नागपुर. देशव्यापी ट्रक हड़ताल का शहर में भी असर देखा गया। शहर से बाहर जाने वाले रास्तों के किनारे खड़े ट्रकों की कतारें देखी गई। ट्रांसपोर्टर्स के अनुसार शहर के आसपास करीब 10000 ट्रक खड़े हो गए। इससे हजारों लेबर की रोजी चली गई। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की ओर से जीएसटी, ऊंची डीजल कीमतों, सडक़ पर ट्रक परिचालकों का उत्पीडऩ, भ्रष्टाचार तथा टोल नीतियों की समस्या के विरोध में दो दिवसीय चक्काजाम जाम का आह्वान किया गया। शहर में कुछ संगठनों की ओर से बंद को समर्थन दिया गया। नागपुर ट्रकर्स यूनिटी के अध्यक्ष कुक्कू मारवाह ने बताया कि डीजल महंगा होने के कारण कई लोग केरोसिन मिक्स कर वाहन चला रहे हैं। इससे ईमानदारी से व्यापार करने वाले ट्रांसपोर्टर्स की मुश्किलें बढ़ गई।

सब्सिडी पर मिलने वाला केरोसिन चोरी-छिप कुछ ट्रक वालों को उपलब्ध कराया जाता है। सरकार को चाहिए कि केरोसिन पर मिलने वाली सब्सिडी को ही समाप्त कर दिया जाए। साथ ही जिन दुकानदारों की ओर से अवैध रूप से केरोसिन उपलब्ध कराया जा रहा है उनका लाइसेंस रद्द किया जाना चाहिए। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि पहले केंद्र द्वारा डीजल में 2 रुपए और अब राज्य सरकार द्वारा एक रुपक की कटौती से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। वर्तमान में क्रूड की कीमतों के हिसाब से डीजल 50 रुपए लीटर मिलना चाहिए जबकि यह 61 रुपए बिक रहा है। जीएसटी के बाद से पहले ही ट्रांसपोर्टर को आर्डर नहीं मिल रहे। जीएसटी के चलते उत्पादन ठप हो गया। कारोबारी माल नहीं मंगा रहे। इससे ट्रांसपोर्टर्स को भी आर्डर नहीं मिल रहे। हालांकि सभी ट्रांसपोर्ट यूनियन हड़ताल में शामिल नहीं हुई। आल इंडिया नागपुर ट्रांसपोर्ट संघ के आरके वर्मा ने बताया कि हड़ताल का कोई खास फर्क नहीं पड़ा। दिल्ली से भी गाडिय़ां आ रही हैं।

उनका कहना है कि एकाएक घोषणा कर देने से हड़ताल सफल नहीं हो जाती। सभी से चर्चा के बाद ही इस तरह का कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। इसके लिए पहले माहौल बनाना पड़ता है। उद्योग और व्यापार जगत से भी सहयोग लिया जाता है। आज हालत यह है कि कोई ट्रक चालक माल ले जाने से मना करेगा तो दूसरा ले जाएगा। जीएसटी में समस्या केवल अनरजिस्टर्ड कारोबारियों के ही संदर्भ में आ रही है। 10.15 प्रतिशत ट्रांसपोर्टर्स को छोड़ बाकी अनरजिस्टर्ड व्यापारी के साथ कारोबार नहीं कर रहे।

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