तिरंगा जिनकी सांसों में बसा वो डर नहीं सकते...

तिरंगा जिनकी सांसों में बसा वो डर नहीं सकते...

Rajendra Sharma | Updated: 14 Aug 2019, 07:20:03 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में सरस काव्य निशा

छिंदवाड़ा. मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा संचालित जिला इकाई पाठक मंच के तत्वावधान में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में एक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। सेवानिवृत्त न्यायाधीश केशव प्रसाद तिवारी के निवास पर हुई इस गोष्ठी में कवियों में स्वतंत्रता पर आधारित कविताएं पढकऱ जोश भरा।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि रत्नाकर रतन ने किया। अध्यक्षता डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव ने की। नवोदित कवि स्वप्निल गौतम ने सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की। कवियत्री अनुराधा तिवारी ने देश भक्ति की अपनी इस कविता से समां बांधा- तिरंगा जिनकी सांसों में बसा वो डर नहीं सकते, कदम जो बढ़ गए आगे पीछे धर नहीं सकते। हमें है नाज भारत के हर शहीदों पर, दिलों पर राज करते हैं कभी वो मर नहीं सकते। छोटी छोटी लाइनों के माध्यम से बेहद सटीक और सारगर्भित बात कहने वाले कवि राजेंद्र यादव ने नया माहौल दिया-भले मोहताज सही मगर मोह ताज का है पंख बख्शे ही नहीं पर हौसला परवाज का है। उम्दा शायर मुबीन जामीन ने माहौल बदला- हमको खुद करना है फूलों की हिफाजत, वरना अपने गुलशन से यह रानाई चली जाएगी।
अपने सरल अंदाज में लोक भाषाओं में बात करने वाले कवि अवधेश तिवारी ने कविताओं के माध्यम से चुटकी ली- जनता ढीली हो गई, तो नेता ढीले जान। खटिया ढीली होत है, यदि ढीली अदवान।
बुंदेलखंडी गीतों को अपने मधुर कंठ के माध्यम प्रस्तुत करते हुए कवियत्री सविता श्रीवास्तव तालियां बटोरीं- अब के साहुन में तुम अइयो, बीरन हम कह रये हैं- मीठा और रुमाल तुम्हारे घर में हम रख रयेे हैं, हमने भेजे राखी डोरा राखी डोरा ने चि_ी पतरा रे, घर में घुस रये बिना बुलाये, पाहुन से बदरा रे, बरस बरस के रीते हो गए साहुुन के बदरा रे घर में घुस रहे बिना बुलाए पाहुन से बदरा रे। कवि रत्नाकर रतन ने अपनी प्रतिनिधि कविता से कार्यक्रम को गति दी-तुमने गीतों को छूकर हर्फ हर्फ पावन कर डाला और पीर हृदय की ऐसी बांटी, आंखों को सावन कर डाला। कवि विशाल शुक्ल ने भारत माता पर अपनी चर्चित कविता पढ़ी-जनसेवकों को समाजसेवा के काम पर, लोगों को धर्म के नाम पर, जब जब लड़ते पाया तो मेरी आंखों में भारत माता का करुण चेहरा उभर आया। मुख्य अतिथि तिवारी ने वर्षा का स्वागत करते गीत से मंच को ऊंचाइयां दी-मेघा उमड़ उमड़ कर आए, नील गगन पर बादल छाएं, अंतस पे कुछ पिघल गया है, मन का मौसम बदल गया है।
वरिष्ठ कवि डॉक्टर कौशल किशोर ने देश प्रेम से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत की। स्विस बैंक में उनका भारत अपना है खलिहानों में, उनका डिस्कोथीकों में है, अपना वीर जवानों में, शान हमारी हिंदी, उनकी इंग्लिश में पहचान अलग। अपना हिन्दुस्तान अलग है उनका हिन्दुस्तान अलग। नवोदित कवि चित्रेश श्रीवास्तव, कल्पना तिवारी, सोनू तिवारी ने भी अपना रचना पाठ कर काव्य यात्रा की शरुआत की।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned