Positive Story: बेटी के दम पर मां ने जीती कोरोना से जंग

जिला अस्पताल में 17 दिन में देखी 22 मौतें, फिर भी बनाए रखी जिंदगी की

By: prabha shankar

Published: 05 May 2021, 12:00 PM IST

छिंदवाड़ा। जिला अस्पताल में एक बहादुर बेटी ने 17 दिन तक तमाम अव्यवस्थाओं से संघर्ष कर अपनी मां को कोरोना संक्रमण से विजय दिला दी। इस दौरान उसने अपने वार्ड में 22 मरीजों की मौतें देखी। फिर भी जिंदगी की आस का हौसला बनाए रखा। एक दिन पहले जब मां को स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज किया गया तो उसने वीडियो साझा कर इस महामारी पर जीत के अनुभव बताए।
चौरई की रहनेवाली इस बेटी का नाम है रानू शर्मा। उनकी मां आशा शर्मा 56 वर्ष का 10 अप्रैल के आसपास तबीयत खराब होने पर इलाज शुरू किया गया था। उसके बाद कोरोना संक्रमण के लक्षण पाए जाने पर 16 अप्रैल को ऑक्सीजन लेवल 65-70 तथा सिटी स्कोर 20 पर था। चौरई से जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया। इस दौरान अस्पताल के कोविड वार्ड में बेड नहीं मिला तो लगातार संघर्ष कर टीबी चेस्ट वार्ड में भर्ती कराया। वार्ड में भर्ती के दौरान रानू को डॉक्टरों के इलाज, दवाइयां और रेमेडसिविर इंजेक्शन के लिए लगातार अकेले दौड़ भाग करनी पड़ी तो वहीं वार्ड में गंदगी और घंटों कोरोना मृतकों के शव के पड़े रहने की स्थिति देखनी पड़ी। खुद रानू बताती है कि 17 दिन अस्पताल में रहने के दौरान उसने 22 मौतें देखी। इस दौरान बीमार मां का हौसला बनाए रखना चुनौती पूर्ण था और खुद को संभालना भी था। कोरोना महामारी से इस संघर्ष में प्रशासन समेत सहयोगी सैय्यद जाफर का योगदान रहा। तमाम प्रयास से मां का ऑक्सीजन लेवल 95 आ गया और अब वे स्वस्थ हो गई है।


कोरोना से बचाव के लिए एक हजार के लिए सैंपल
कोरोना सैंपलिंग टीम द्वारा संदिग्ध संक्रमित मरीजों की सैंपलिंग का कार्य जारी रहा। मंगलवार को एक हजार व्यक्तियों के सैंपल लिए गए । इनमें छिंदवाड़ा विकासखंड में 138, अमरवाड़ा में 50, परासिया में 100, जामई में 75, पांढुर्णा में 100, हर्रई में 90, सौंसर में 120, बिछुआ में 100, मोहखेड़ में 94, चौरई में 75 और तामिया में 58 शामिल है।

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