परिवहन अधिकारी ने तय की स्कूल संचालकों की जिम्मेदारी, जानें क्या है माजरा

परिवहन अधिकारी ने तय की स्कूल संचालकों की जिम्मेदारी, जानें क्या है माजरा

Rajendra Sharma | Updated: 04 Jul 2019, 02:20:03 PM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

आरटीओ कार्यालय में बैठक आयोजित

छिंदवाड़ा. निजी स्कूल संचालकों की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर भी तय कर दी गई है। परिवहन अधिकारी ने बुधवार को कार्यालय में निजी स्कूल के संचालक और प्राचार्यों की बैठक ली। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अनुबंधित वाहनों के अलावा जो छोटे वाहन छात्र-छात्राओं का परिवहन करते हैं, उनकी भी जानकारी अपने पास रखें। शिक्षण संस्थान इस कार्य की देख-रेख के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करें जो कि शाला प्रवेश द्वार पर छात्रों को लाने ले जाने वाले प्रत्येक वाहन की जानकारी दर्ज कराए। ‘पत्रिका’ इस मुद्दे को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित कर रहा है।
आरटीओ सुनील कुमार शुक्ला ने बुधवार को बैठक में शामिल हुए निजी स्कूल संचालक और प्राचार्यों को मध्यप्रदेश शासन परिवहन विभाग से जारी किए गए निर्देशों से अवगत कराया। परिवहन अधिकारी सुनील कुमार शुक्ला ने जिले के सभी शिक्षण संस्थान के प्रबंधक और प्रिंसिपल को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए। वाहन स्वामियों एवं स्कूल संचालकों को निदेशित किया कि जिन वाहन स्वामियों द्वारा स्कूल बस के परमिट एवं फिटनेस प्राप्त नहीं किए हैं उन वाहनों को स्कूल में संचालन की अनुमति न दें। स्कूल बस पीले रंग में होनी चाहिए। बसों पर स्कूल बस पीछे एवं आगे भाग पर लिखा होना जरूरी है। अनुबंधित बस हो तो बस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। स्कूल बस में फस्र्ट एड बॉक्स की सुविधा, बस में गति मापक यंत्र लगा हो, बसों में अग्निशमन यंत्र, प्रदूषण प्रमाण-पत्र होना अनिवार्य है। बसों की खिड़कियों पर सरिए की जाली, बस पर स्कूल का नाम व फोन नम्बर लिखा होना चाहिए। बसों में दरवाजे पर लगे ताले ठीक स्थिति में हों, बसों में प्रशिक्षित परिचालक होना चाहिए।

पालक के जाने की सुविधा

किसी पालक को बस में सुरक्षा मुआयना करने की दृष्टि से जाने की सुविधा होनी चाहिए। चालक के पास कम से कम 5 वर्ष पुराना यात्री वाहन चलाने का लाइसेंस होना अनिवार्य है। प्रत्येक स्कूल बस में पुरुष परिचालक की जगह या पुरुष परिचालक के साथ महिला सहायक की नियुक्ति के संबंध में। बस ड्राइवर को अशोक लीलैण्ड इंस्टीट्यूट लिंगा के ट्रेनिंग सेंटर से तीन दिवसीय परीक्षण लेना होगा। शिक्षण संसथान के संचालक को निर्देश दिए कि प्रशिक्षित चालक और परिचालक को ही वाहन चलाने की अनुमित दें। परिवहन अधिकारी सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि तीन दिनों तक लगातार जांच की जाएगी।

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