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समर्थन मूल्य पर 3000 क्विंटल धान की खरीद

सेवा सहकारी समिति अमरवाड़ा एवं हर्रई तथा मार्केटिंग सोसायटी अमरवाड़ा में किसानों से धान की खरीद की जा रही है। शासन द्वारा निर्धारित १९40 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर खरीदी की जा रही है ।अभी तक 3000 क्विंटल धान खरीदी की जा चुकी है। सेवा सहकारी समिति अमरवाड़ा के प्रबंधक गोपाल साहू और क्रेता प्रेम कहार ने बताया 60 किसानों से 1566 क्विंटल धान खरीदी की जा चुकी है।

छिंदवाड़ा

Published: December 22, 2021 05:19:52 pm

छिन्दवाड़ा/अमरवाड़ा . सेवा सहकारी समिति अमरवाड़ा एवं हर्रई तथा मार्केटिंग सोसायटी अमरवाड़ा में किसानों से धान की खरीद की जा रही है। शासन द्वारा निर्धारित १९40 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर खरीदी की जा रही है ।सेवा सहकारी समिति अमरवाड़ा के प्रबंधक गोपाल साहू और क्रेता प्रेम कहार ने बताया अभी तक 60 किसानों से 1566 क्विंटल धान खरीदी की जा चुकी है। इसी प्रकार मार्केटिंग सोसायटी के प्रबंधक मोहन पांडे क्रेता चंदू वर्मा ने बताया है कि मार्केटिंग सोसायटी द्वारा अमरवाड़ा एवं अन्य क्षेत्रों के किसानों से खरीदी जारी है। अभी तक 25 किसानों की 600 क्विंटल धान खरीदी जा चुकी है। वहीं सेवा सहकारी समिति हर्रई ने 50 किसानों से 800 क्विंटल धान की खरीदी की है। तीनों केंद्रों में लगभग 2400 किसानों ने पंजीयन कराया है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को शीतलहर पाला से बचाव की सलाह दी गई है। उप संचालक कृषि जितेन्द्र कुमार सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि जब भी पाला पडऩे की संभावना हो या मौसम पूर्वानुमान विभाग से पाले की चेतावनी दी गई हो तो फसल में हल्की सिंचाई दे देनी चाहिए, जिससे तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरेगा और फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। सिंचाई करने से 0.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान में बढ़ोत्तरी हो जाती है। उन्होंने बताया कि पाले से सबसे अधिक नुकसान नर्सरी में होता है, इसलिये नर्सरी में पौधों को रात में प्लास्टिक की चादर से ढक देना चाहिए। इससे प्लास्टिक के अन्दर का तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है, जिससे सतह का तापमान जमाव बिंदु तक नहीं पहुंच पाता और पौधे पाले से बच जाते हैं। पॉलीथिन की जगह पर पुआल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। पौधों को ढकते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि पौधों का दक्षिण-पूर्वी भाग खुला रहे ताकि पौधों को सुबह व दोपहर को धूप मिलती रहे। कि किसान अपनी फसल को पाले से बचाने के लिए अपने खेत में धुंआ पैदा कर दें, जिससे तापमान जमाव बिंदु तक नहीं गिर पाता और पाले से होने वाली हानि से बचा जा सकता है। दीर्घकालीन उपाय के संबंध में बताया कि फसलों को बचाने के लिए खेत की उत्तरी-पश्चिमी मेड़ों पर और बीच-बीच में उचित स्थानों पर वायु अवरोधक पेड़ जैसे शहतूत, शीशम, बबूल, अरडू, जामुन आदि लगा दिए जाएं तो पाले और ठंडी हवा से फसल का बचाव हो सकता है।
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