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Railway: छिंदवाड़ा-जबलपुर तक डीजल इंजन से ट्रेन चलना मुश्किल, अगले वर्ष ही मिलेगी सुविधा

रेलवे अधिकारी छिंदवाड़ा से नैनपुर के बीच शेष बचे इलेक्ट्रिक कार्य पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। लगभग आठ माह और इंतजार करना होगा।

छिंदवाड़ा

Published: July 12, 2022 03:01:39 pm



छिंदवाड़ा. जनप्रतिनिधियों के बार-बार पत्र लिखने एवं समाजसेवी संगठनों के ज्ञापन सौंपने के बावजूद भी रेलवे अधिकारी छिंदवाड़ा से सिवनी, नैनपुर होते हुए जबलपुर तक डीजल इंजन से ट्रेन चलाने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। सूत्रों की मानें तो रेलवे अधिकारी छिंदवाड़ा से नैनपुर के बीच शेष बचे इलेक्ट्रिक कार्य पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। जबकि इलेक्ट्रिक कार्य पूरा होने में अभी छह से सात माह और लगेंगे। इसके बाद सीआरएस का निरीक्षण होगा और फिर अप्रूवल मिलने के बाद ही इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन चल सकेगी। ऐसे में लंबे समय से छिंदवाड़ा-जबलपुर तक नवनिर्मित बड़ी रेल लाइन पर ट्रेन सुविधा की राह देख रहे लोगों को अभी लगभग आठ माह और इंतजार करना होगा। हालांकि रेलवे से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि नियमानुसार सीआरएस के अप्रूवल मिलने के बाद छह माह के अंदर यात्री ट्रेन चलानी पड़ती है। किसी कारणवश निर्धारित अवधि में ट्रेन नहीं चली तो फिर से सीआरएस कराना होगा। वरिष्ठ रेलवे अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं। गौरतलब है कि बीते 13 मार्च को सीआरएस ने छिंदवाड़ा-नैनपुर मंडला फोर्ट रेल परियोजना का अंतिम खंड चौरई से भोमा(५४ किमी) रेलमार्ग को अप्रूव किया था। तब से ही लोग छिंदवाड़ा से सिवनी, नैनपुर होते हुए जबलपुर तक ट्रेन सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। छिंदवाड़ा से सिवनी, नैनपुर एवं आसपास का क्षेत्र दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत आता है। लगभग छह वर्ष पहले तक इस क्षेत्र में नैरोगेज ट्रेन का परिचालन होता था। इसके बाद नैरोगेज ट्रेन का परिचालन बंद कर दिया गया। ब्राडगेज के लिए चरणबद्ध कार्य शुरु हुआ। चार माह पहले परियोजना पूरी होने के बाद भी ट्रेन का परिचालन शुरु नहीं हुआ।
Good news: Railway has released the list of trains running with general tickets
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स्पीड ट्रायल से जगी थी उम्मीद
लगभग एक माह पहले 9 जून को नागपुर से आए वरिष्ठ रेल अधिकारियों की मौजूदगी में डीजल इंजन से छिंदवाड़ा से नैनपुर(140 किमी रेलमार्ग) तक अधिकतम 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफल ट्रायल किया गया था। इस ट्रायल के बाद उम्मीद जगी की रेलवे जल्द ही डीजल इंजन से ट्रेन चलाएगा, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है।
भोमा से चौरई तक का कार्य शेष
जबलपुर से नैनपुर तक इलेक्ट्रिक कार्य हो चुका है और वहां ट्रेन भी चल रही है। वहीं नैनपुर से पलारी तक एवं छिंदवाड़ा से चौरई तक भी इलेक्ट्रिक कार्य पूरा होने बाद सीआरएस का निरीक्षण एवं अप्रूवल हो चुका है। इलेक्ट्रिक कार्य पीजीसीआईएल कंपनी कर रही है। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि पलारी से भोमा तक तीन से चार दिन का काम शेष है। अब केवल भोमा से सिवनी 20 किमी एवं सिवनी से चौरई लगभग 32 किमी रेलमार्ग पर इलेक्ट्रिक कार्य होना शेष है। हालांकि बारिश में कार्यों की रफ्तार एकदम धीमी हो गई है। अगले दो से तीन माह बारिश की वजह से कार्य काफी कम होंगे। दिसंबर-2022 तक छिंदवाड़ा से नैनपुर तक शेष बचा इलेक्ट्रिक कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।
यात्रियों की मजबूरी, बस सहारा
छिंदवाड़ा से नैनपुर होते हुए जबलपुर तक रेलमार्ग की कुल दूरी लगभग २५० किमी है। ट्रेन सुविधा न होने की वजह से छिंदवाड़ा से जबलपुर पहुंचने के लिए लोगों को बस एवं निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। लोगों का कहना है कि अब तक महंगा किराया देना उनकी मजबूरी थी, लेकिन अब जबकि रेलमार्ग का कार्य पूरा हो चुका है तो उन्हें सुविधा मिलनी चाहिए।
व्यापारियों को होगा फायदा
छिंदवाड़ा से नैनपुर होते हुए जबलपुर तक ट्रेन सुविधा बहाल हो जाने से छिंदवाड़ावासियों एवं आसपास के जिले के लोगों को काफी फायदा पहुंचेगा। उत्तर प्रदेश, बिहार सहित अन्य राज्यों में जाने के लिए ट्रेन सुविधा भी मिल जाएगी। पैसे के साथ समय की भी बचत होगी। व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेगी। इसके अलावा रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे।
अधिक खर्च होना वजह
रेलवे से जुड़े अधिकारियों की मानें तो आने वाले समय में रेलवे की योजना है कि पूरे देश में इलेक्ट्रिक इंजन से ही ट्रेन का परिचालन किया जाए। इसके पीछे वजह यह है कि इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन का परिचालन करने पर खर्च कम आता है जबकि डीजल इंजन से ट्रेन का परिचालन करने पर खर्च अधिक होता है। यही वजह है कि रेलवे इलेक्ट्रिक कार्य होने के बाद ही ट्रेन का परिचालन करना चाह रहा है। हालांकि लोगों की समस्या को देखते हुए अगर जनप्रतिनिधि चाहें एवं रेलवे अधिकारियों की इच्छाशक्ति हो तो कुछ माह के लिए डीजल इंजन से ट्रेन चलाई जा सकती है।

इनका कहना है...
कुछ दिन पहले मैंने डीआरएम से ट्रेन चलाने की मांग उठाई थी। उनका कहना था कि हम अगर रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजेंगे तो भी मंजूर नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि डीजल इंजन से ट्रेन चलाने पर खर्च अधिक आएगा। मैंने डीआरएम से कहा था कि आप प्रस्ताव भेजिए। जल्द ही डीआएम से मुलाकात कर लोगों की समस्या रखी जाएगी।
विजय धवले, जोनल सदस्य, दपूमरे, बिलासपुर जोन
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छिंदवाड़ा से नैनपुर के बीच शेष बचे इलेक्ट्रिक कार्य किए जा रहे हैं। दिसंबर-2022 तक लक्ष्य है।
रवीश कुमार, सीनियर डीसीएम, दपूमरे, नागपुर मंडल

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