Railway: रैक बुकिंग में अनियमितता को लेकर विजिलेंस टीम की जांच ठंडे बस्ते में

छिंदवाड़ा मॉडल रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण किया था।

By: ashish mishra

Published: 03 Dec 2019, 12:18 PM IST

छिंदवाड़ा. रैक बुकिंग को लेकर अनियमितता की शिकायत की जांच ठंडे बस्ते में चली गई है। ऐसे में अनियमितता में लिप्त लोगों के हौंसले भी बुलंद हैं। गौरतलब है कि बीते 17 नवंबर को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन मुख्यालय बिलासपुर से ट्रैफिक विजिलेंस टीम ने छिंदवाड़ा मॉडल रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण किया था। हालांकि अधिकारी इसे रूटिन प्रक्रिया बता रहे थे। निरीक्षण में ऐसा पहली बार हुआ जब विजिलेंस टीम ने बुकिंग, पार्सल के साथ गुड्स ऑफिस में भी दबिश दी। टीम यहां काफी देर रूकी और दस्तावेज खंगाले। इस जांच के बाद ऐसा लग रहा था कि रेलवे द्वारा जल्द ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब तक जांच महज दिखावा ही साबित हो रही है।

अधिकारियों की मिलीभगत का भी संदेह
सूत्रों की मानें तो रैक बुकिंग का खेल बिना रेलवे विभाग के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से संभव नहीं है। इस खेल के तार न केवल बाहरी राज्य के बड़े व्यापारी बल्कि नागपुर और बिलासपुर रेलवे कार्यालय से भी जुड़े होने का अंदेशा है। गौरतलब है कि सस्ता साधन होने की वजह से व्यापारी अनाज के परिवहन के लिए गुड्स ट्रेन पर निर्भर रहते हैं। रेलवे द्वारा ऑनलाइन माध्यम से रैक बुक किए जाते हैं। बीते कुछ वर्ष से रैक बुकिंग का लाभ छिंदवाड़ा एवं आसपास के जिलों के व्यापारियों को नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे वजह दिल्ली सहित अन्य जगहों के व्यापारियों का बड़े पैमाने पर रैक बुकिंग करना सामने आ रहा है। रेलवे के नियम के अनुसार व्यापारी को रैक बुकिंग के लिए जीएसटी सहित लगभग 52 हजार पांच सौ रुपए बुकिंग राशि आवेदन के साथ रेलवे के पास जमा की जाती है। दस दिन में अगर व्यापारी को रैक नहीं मिलता है तो बुकिंग राशि व्यापारी को वापस कर दी जाती है, लेकिन आवेदन निरस्त नहीं होता है। रैक की उपलब्धता होने पर जिस व्यापारी का आवेदन पहले लगा हुआ है उसे प्राथमिकता दी जाती है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली और अन्य प्रांत के व्यापारी रेलवे के कुछ अधिकारियों से मिलीभगत कर छिंदवाड़ा, जबलपुर, गढ़ा, नरसिंहपुर सहित अन्य जगहों के लिए राशि जमा कर रैक पहले ही बुक कर देते हैं। रेलवे अधिकारी कोई न कोई कारण से रैक व्यापारी को दस दिन में उपलब्ध नहीं कराते। ऐसे में व्यापारी का पैसा भी बच जाता है और उसका आवेदन भी बरकरार रहता है। रैक बुकिंग के लिए जब कोई नया व्यापारी आवेदन लगाता है तो उसे पहले व्यापारी के आवेदन के बाद प्राथमिकता दी जाती है। यही से रैक बुकिंग के खेल में कमाई शुरु होती है। मजबूरी में व्यापारियों को पहले बुकिंग करने वाले व्यापारियों को अधिक दाम देकर माल भेजवाना पड़ता है।


रैक बुकिंग में अनियमितता को लेकर राज्यसभा सांसद प्रभारी छिंदवाड़ा और रेलमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। अगले हफ्ते बिलासपुर में होने वाली बैठक में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से रखूंगा।
सत्येन्द्र ठाकुर, जोनल सदस्य, दपूमरे, बिलासपुर

Patrika
ashish mishra Desk
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