नगरीय निकायों में धन के दुरुपयोग की ये हैं वजह

नगरीय प्रशासन विभाग ने कार्यशैली पर उठाई आपत्तियां, कहा-बिना तथ्यों के तैयार होते हैं बजट

By: manohar soni

Published: 07 Jan 2019, 11:34 AM IST


छिंदवाड़ा.नगर निगम और नगरपालिका में सरकारी धन के दुरुपयोग और गड़बडि़यों के ऑडिट में पकड़ जाने के बाद भी स्थानीय परिषदों की उदासीनता पर नगरीय प्रशासन विभाग ने तंज कसा है। विभागीय आपत्ति यह है कि ऑडिट रिपोर्ट पर परिषदों के न तो सम्मेलन बुलाए जाते हैं और ना ही उसे सुधारने की कभी चर्चा होती है। इसके अलावा बिना तथ्यों के वार्षिक बजट तैयार कर लिए जाते हैं। इसके अलावा प्राप्त आय से पांच प्रतिशत संचित निधि भी जमा नहीं की जा रही है। नगरीय निकायों में कहीं कोई राशि गबन भी कर ली जाती है तो भी उसे वसूल करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जाते। कभी भी किसी को भी अतिरिक्त भुगतान कर दिया जाता है।
नगरीय प्रशासन आयुक्त गुलशन बामरा द्वारा निगम आयुक्त और सीएमओ के नाम जारी पत्र में कहा गया कि महालेखाकार द्वारा समय-समय ली आपत्तियां का निराकरण तुरंत किया जाए और इसका प्रतिवेदन नगरीय विकास संचालनालय को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
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निकायों की कार्यशैली पर ये खास आपत्तियां
१.वार्षिक ऑडिट प्रतिवेदन की चार माह की अवधि में विचार के लिए परिषद का विशेष सम्मेलन बुलाने का नियम है। इसका पालन कहीं भी नहीं किया जा रहा है।
२.निकाय प्रशासन द्वारा बजट अनुमान के आंकलन में पर्याप्त सावधानी नहीं रखी जा रही है। काल्पनिक आधार पर बजट अनुमान तैयार की जा रहे हैं। इससे आय-व्यय में लगातार कमी आ रही है।
३.नगर निकायों में प्राप्त आय के आधार पर पांच फीसदी संचित निधि जमा नहीं की जा रही है।
४.अधिकारियों द्वारा वित्त वर्ष की समाप्ति 31 मार्च को बैंक समाधान पत्रक तैयार नहीं किए गए हैं।
५. किसी मद की राशि में कम राशि जमा कर वसूल राशि का भक्षण किया गया तो उस पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। जबकि अनुशासनिक कार्रवाई आवश्यक है।
६.निकायों को निजी स्रोतों से प्राप्त आय के 65 प्रतिशत अथवा सफ ाई कर्मी की स्थिति में 75 प्रतिशत तक स्थापना में सीमित रखने के निर्देश दिए गए। इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
७.शासन के निर्देश पर सीमा से अधिक धनराशि का भुगतान किया जा रहा है।
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