आखिर क्यों छोडऩा पड़ता है मां-बाप को खुद का घर, पढि़ए चौंकाने वाली खबर

92 बुजुर्गों में से 40 छिंदवाड़ा शहर के निवासी वृद्धाश्रम में रह रहे, ज्यादातर मामलों में बहू की बदसूलकी से तंग आकर बुजुर्गों ने छोड़ा घर

By: prabha shankar

Published: 10 Nov 2017, 11:29 AM IST

छिंदवाड़ा . अपना घर किसे प्यारा नहीं होता, लेकिन बेटे के सामने बहू की दुत्कार भला कौन मां-बाप सुन सकेगा। वह भी तब, जब बेटा बहू की गलती के बाद भी मां-बाप का पक्ष नहीं लेता। शहर के गोधुलि वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों में से ज्यादातर ऐसे हैं जिनका घर वृद्धाश्रम से महज चंद कदमों की दूरी पर है। बुजुर्ग जब जी करता है बच्चों को देखने घर चले जाते हैं, लेकिन वहां रहते नहीं। इसके पीछे कई वजह हैं । कुछ बुजुर्ग बहू के सख्त तेवर से वृद्धाश्रम आ गए हैं वहीं कुछ बच्चों की गरीबी देखकर उसने दूर हो गए हैं। जबकि कुछ के परिवार में कोई नहीं है।

हैरानी की बात यह है कि गोधुलि वृद्धाश्रम में वर्तमान में कुल 92 बुजुर्ग रह रहे हैं। इनमें से40 छिंदवाड़ा शहर के ही निवासी हैं। ज्यादातर प्रियदर्शिनी कॉलोनी, गुलाबरा, मोहननगर, चंदनगांव, सुकलूढाना, राजपाल चौक, श्याम टॉकीज, बरारीपुरा निवासी बुजुर्ग शामिल हैं। ऐसे में यह समझना कठिन नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्र में कम सुविधाओं में भी शहर की अपेक्षा बुजुर्गों का ख्याल अधिक रखा जाता है।

24 कमरे में रह रहे ९२ बुजुर्ग
वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। यहां कुल 24 कमरे बनाए गए हैं। जबकि वर्तमान में कुल ९२ बुजुर्ग हैं। ऐसे में एक कमरे में चार से पांच बुजुर्ग रह रहे हैं।

मां-बेटी, भाई वृद्धाश्रम में रह रहे साथ
प्रियदर्शिनी कॉलोनी में स्थित गौधुलि वृद्धाश्रम में कुल 92 बुजुर्गों में से 47 पुरुष व 45 महिलाएं हैं। इनमें पांच दम्पती हैं। वहीं दो भाई और मां बेटी भी साथ रह रही हैं।

मिलती हैं ये सुविधाएं
वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के लिए दोनों टाइम निशुल्क खाना, चाय, नाश्ता, डॉक्टरी व्यवस्था, निशुल्क दवा की सुविधा दी जाती है। इसके अलावा तीन सौ रुपए प्रति माह वृद्धा पेंशन है। वृद्धाश्रम को नपानि की देखरेख में संचालित किया जा रहा है और सामाजिक न्याय विभाग से बजट जारी किया जाता है।

वृद्धाश्रम में रहने के लिए क्या है जरूरी
वृद्धाश्रम में रहने के लिए जरूरी है कि महिला या पुरुष की उम्र ६० वर्ष से ऊपर हो। इसके अलावा वह जिस जगह से आए हैं वहां के पार्षद, सरपंच या फिर सचिव द्वारा भेजा गया पत्र हो।

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