3000 का था वादा, हकीकत में कहीं 200 तो कहीं 400 का झुनझुना

सालभर से नहीं मिला आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया

By: prabha shankar

Published: 07 Jun 2018, 08:00 AM IST

छिंदवाड़ा . किराए से चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को एक साल से किराया नहीं मिला है। इसकी वजह आवंटन में असमंजस होना बताया जा रहा है। जिले में कुल 3057 केंद्रों में से 864 ऐसे हैं जो किराए के भवन में संचालित हैं। 527 केंद्र ग्रामीण क्षेत्र के हैं। दरअसल केंद्रों के निर्धारित मापदण्ड और निर्देश के अनुसार विभाग ने एमआईएस में एक टूल बनाया था जिसके माध्यम से किराए के भवन में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के सम्बंध में जानकारी दर्ज की जानी थी। बताया जा रहा है कि इन आंकड़ों में विरोधाभास होने के कारण ही बजट लम्बित हो रहा है। हालांकि स्थानीय अधिकारी टुकड़ों में बजट आने की बात कह रहे हैं।
ग्रामीण परियोजना के 527 केंद्र किराए के कमरों में चल रहे हैं। एमआईएस में जो आंकड़ा दर्ज है वह 476 है। इनमें 16 भवन ऐसे है जिन्हें 200 रुपए से भी कम किराया दिया जा रहा है। 224 केंद्रों को 200 से 500 रुपए के बीच और 236 केंद्रों को 500 से 750 रुपए तक किराया दिया जा रहा है।

किराए ज्यादा देने लिया था निर्णय
केंद्रों के संचालन के लिए बड़े मकान किराए से लेने का निर्णय विभाग ने चार साल पहले ही ले लिया था। इसके अंतर्गत भवन के लिए दिए जाने वाले किराए को भी 750 रुपए से बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह देना निर्धारित किया था, लेकिन ज्यादातर कार्यकर्ताओं ने नए भवन किराए से लिए ही नहीं क्योंकि उनका कहना है कि पहले विभाग तय तो करे कि किराया हर माह भेजा जाएगा। शहर की ही बात करें तो कुछ कार्यकर्ताओं ने बड़े भवन किराए पर लिए हैं, लेकिन पिछले एक साल से विभाग ने उन्हें किराया नहीं दिया। उन्हें अपने पास से किराया देना पड़ रहा है। विभाग से उन्हें यह पैसा कब मिलेगा पता नहीं।

आज फिर होगी चर्चा
गुरुवार सात जून को होने वाली विभाग की वीडियो कॉन्फ्रेंंसिंग में इस मुद्दे पर जिलेवार भोपाल में बैठे अधिकारी फिर चर्चा करने वाले हैं। इसमें जिला अधिकारियों से संलग्न की गई रिपोर्ट पर फिर से समीक्षा कर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा जाएगा ताकि बजट का आवंटन जल्द और पूरा किया जा सके।

कुछ बजट आया है जो दिया जा रहा है
तकनीकी कारणों से आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए का आवंटन धीमी गति से हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कुछ बजट आया है जो उन्हें दिया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों का भी किराया भी जल्द आ जाएगा।
एमएल मेहरा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना

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