boycott election : चुनाव का बहिष्कार करने के बाद नहीं बनी इस गांव की सडक़

Sanjay Kumar Dandale

Updated: 19 Nov 2019, 05:33:51 PM (IST)

Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

छिंदवाड़ा/अम्बामाली. मोहखेड़ मुख्यालय से लगभग 39 किमी दूरी पर बसा गांव मछेरा का टोला निब्बुखेड़ा जहां नेशनल हाईवे बैतूल-छिंदवाडा से निब्बुखेडा जाने के लिए एक मात्र रास्ता है। वह भी जंगलो से होकर जाता है। सडक़ बहुत ही खराब होने के कारण निब्बुखेड़ा टोला मे एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी घर में ही हो जाती है । जिससे गर्ववती महिला एवं बच्चे की जान का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पूर्व हमने प्रशासन का ध्यान हमारे ओर केन्द्रित कराने विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया था । वहीं गांव में जिला और जनपद के अधिकारी ने आकर आश्वासन दिया था कि आपके गांव की सडक़ जल्द बन जायेगी परंतु अब तक ना सडक़ बनी ना कोई अधिकारी दोबारा आया है।
निब्बुखेड़ा गांव से मेन रोड जाने के लिए स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी, वहीं बीमारों को सुनसान पत्थरों वाली कच्ची सडक़ से होकर आना जाना पड़ता है। वहीं स्कूल छात्राएं भी आना जाना करती है जिन्हें हमेशा डर बना रहता है।
वहीं ग्राम की महिलाओं का कहना है कि जब हमारे गांव तक एंबुलेस नहीं आती तब हमें मेन रोड तक 4 से 5 लोगो को चारपाई पर गर्ववति महिलाओं एवं मरीजों को लाना पड़ता है। इससे जिलेभर के अधिकारी भी अंजान नहीं है परंतु अधिकारी सिर्फ टालमटोली करते है। बारिश के दिनों में गांव पहुंचने के लिए नदी का पानी कम होने का इंतजार भी करना पड़ता है। वहीं कलेक्टे्रट जानकारी प्राप्त हुई है कि ग्राम पंचायत मछेरा से निब्बूखेड़ा ढाना तक सडक़ निर्माण कार्य प्रस्तावित है। इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग की गई है।

&प्रशासन के अधिकारी चुनाव में जो वादे किए वह तक के भूल गए। सडक़ बनवाने के आज तक कोई नहीं आया है। ऐसे में आज भी मुसीबत का सामना बीमार एवं गर्ववती महिलाओं सहित परिजन को करना पड़ रहा है। गर्भवती महिला को आज भी चादर की झोली में रखकर लाया जाता है। फिर भी प्रशासन ने निब्बुखेडा ढाना का सुध नहीं ली। गांव की आबादी लगभग ४०० से अधिक है।
ईश्वर वाडिवा, स्थानीय निवासी
&निब्बुखेड़ा गांव तक एंबुलेंस नहीं आने से कई बार घरों में ही गर्भवती महिलाओं का प्रसव हो जाता है। जिससे कई बार जान जाने का खतरा भी बन जाता है। इसके अलावा परेशानी अलग होती है।
रामवती भसोम, आशा कार्यकर्ता
&हम ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव बहिष्कार किया जा रहा था तब आलाअधिकारियों ने आश्वासन देकर एवं समझाबुझाकर मतदान करा दिया गया लेकिन आज भी इन ग्रामवसियों को आवागमन के लिए सडक़ की सुविधा प्रदान नहीं की गई है।
गामाजी भासम, ग्रामीण

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