हिंदू धर्म की वैज्ञानिकता को दुनिया के सामने रखेगा सर्वमंगलापीठ, जानें मंशा

हिंदू धर्म की वैज्ञानिकता को दुनिया के सामने रखेगा सर्वमंगलापीठ, जानें मंशा

Rajendra Sharma | Publish: Feb, 15 2018 11:39:48 AM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

दशहरा मैदान में चली रही श्रीराम कथा का पांचवां दिन

छिंदवाड़ा. वृंदावन में सर्वमंगलापीठ की स्थापना की जा रही है। लगभग १५० करोड़ रुपए की लागत से इस महत्वाकांक्षी और महत्वपूर्ण प्रकल्प का निर्माण किया जा रहा है। इस सम्बंध में साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि हिंदू धर्म की वैज्ञानिकता को दुनिया के सामने रखने के उद्देश्य से इसका निर्माण किया जा रहा है। भारत और भारत की संस्कृति पर सदियों से हमले होते रहे हैं। भारत को सपेरों का देश बताया गया और हिंदू धर्म की उपासना पद्धति, रीति-रिवाजों और मान्यताओं को दकियानूसी बताने का षड्यंत्र रचा गया। इस षड्यंत्र में हम सनातनी भी उलझकर रह गए और अज्ञानतावश अपने ही आराध्यों,धर्म, संस्कृति का मज़ाक उड़ाने लगे। भारत और हिंदू धर्म के खिलाफ वैश्विक स्तर पर षड्यंत्र लगातार जारी हैं। ये षड्यंत्र तभी असफ ल होंगे जब हम हिन्दू धर्म-संस्कृति की वैज्ञानिकता को समझ सकेंगे।
उनके साथ आई साध्वी सत्यप्रिय ने बताया कि हिंदू संस्कृति को पूरा विश्व जाने समझे और उसकी वैज्ञानिकता को समझे यह इसका मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए पूरे देश के लोगों से सहयोग मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी का फर्ज बनता है कि कम से कम एक शिला का सहयोग इस निर्माण कार्य में अपनी तरफ से किया जाए।

‘राम नहीं बन सकते, राम के तो बनो’

दशहरा मैदान में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि राम बनाना आसान नहीं है, लेकिन हम राम के तो बन सकते हैं। ऐसा करने से हम खुद का ही कल्याण करेंगे। बुधवार को राम के वन गमन की कथा उन्होंने सुनाई। पिता का दिया वचन झूठा न हो इसलिए उन्होंने सहजता से वन को जाना स्वीकार किया। राम के साथ लक्ष्मण और सीता भी उनके साथ वनवास पर गए। सरयू के तट पर केवट प्रसंग भी बड़े भावपूर्ण तरीके से उन्होंने सुनाया।
राजनीति ने बांटा भगवान और जातियों को: साध्वी ने कहा कि हिन्दुओं के देवता किसी एक के नहीं है। हमारे यहां भगवान जगन्नाथ कहलाते हंै। जाति के नाम पर हमारे यहां राजनीति की जा रही है और भगवान को बांटा जा रहा है। शूद्र शब्द का अर्थ बदल दिया गया है।
ब्राह्मण मति या बुद्धि का प्रतिक है तो क्षत्रिय शक्ति का। वैश्य हमारी स्थिति हालात को स्थिर रखता है तो शूद्र गति प्रदान करता है। हमारे यहां तो किसी के प्रति आदर प्रगट करना हो तो उसके चरण ही छुए जाते हंै। चारों में से एक का भी महत्व कम हुआ तो स्थिति डावांडोल हो जाएगी।

अध्यात्म यानी स्वयं में रहना

साध्वी ऋतम्भरा ने कहा की अंत: करण में शुद्धता ही अध्यात्म है। साधना, उपासना, आराधना, व्रत और सत्संग से इसे हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा की सत्संग में सब प्रपंच दु:ख वेदना भावो को छोडक़र आएं तो महसूस होगा की हमने क्या पा लिया है।

Sarvangalpith is being established in Vrindavan

आगे आकर दे रहे सहयोग राशि

छिंदवाड़ा के आयोजन के दौरान भी कई श्रद्धालु आगे आकर सर्वमंगलापीठ के निर्माण के लिए सहयोग राशि दे रहे हैं। साध्वी ने बताया कि पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष कन्हईराम रघुवंशी ने वृंदावन में बन रही सर्वमंगलापीठ का ट्रस्टी बनते हुए पांच लाख रुपए देने की घोषणा की है। महापौर कांता सदारंग ने भी ५१ हजार रुपए का सहयोग दिया है। एक शिला के लिए ११०० रुपए सहयोग राशि ली जा रही है। बुधवार को भी आयोजन स्थल पर पहुंचे श्रद्धालुओं के साथ कई सामाजिक संगठनों ने यह सहयोग राशि ट्रस्ट के नाम दी है।

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