नई गाइडलाइन: बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल प्रबंधन ही होंगे जिम्मेदार

नई गाइडलाइन: बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल प्रबंधन ही होंगे जिम्मेदार
School management will be responsible for the safety of children

Prabha Shankar Giri | Publish: Jul, 02 2019 11:15:23 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

परिवहन आयुक्त ने जारी किए निर्देश: वाहनों की रखनी होगी पूरी जानकारी

छिंदवाड़ा. प्राइवेट स्कूलों में पढऩे वाले उन बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अब स्कूल प्रबंधन की होगी जो किसी भी तरह के स्कूली वाहन से स्कूल आते-जाते हैं। अभी तक पुलिस और परिवहन की जिम्मेदारी बताकर स्कूल संचालक पल्ला झाड़ लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। परिवहन आयुक्त ने साफ तौर पर निर्देश जारी किए हैं जिसमें उल्लेख किया है कि स्कूली वाहनों की पूरी जानकारी रखने के साथ ही चालक का सत्यापन कराना भी उन्हीं की जिम्मेदारी होगी।
जिले में संचालित निजी स्कूलों के पास छोटे वाहनों की कोई जानकारी नहीं है। वैन और ऑटो के चालकों का आज तक सत्यापन नहीं कराया गया है। सुरक्षा को लेकर प्रबंधन पूरी तरह से लापरवाह है। किस वाहन से कितने बच्चे स्कूल आ रहे हैं इसकी भी कोई जानकारी उनके पास नहीं है। जिलेभर में एक हजार स्कूल वैन रसोई गैस से संचालित हो रहीं हैं। आज तक पुलिस और परिवहन विभाग ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। सबसे खास बात यह कि स्कूल प्रबंधन ने भी कोई आपत्ति नहीं उठाई। इसी वजह से वाहन चालकों की मनमानी सडक़ पर साफ दिखाई देती है। संचालक की ओर से कोई सख्ती ड्राइवरों पर नहीं बरती जाती। पुलिस और परिवहन विभाग ही कभी-कभी जांच-पड़ताल करते हैं जिसका कोई असर नहीं होता।

परिवहन आयुक्त ने जारी किए निर्देश: वाहनों की रखनी होगी पूरी जानकारी
- कौन सा बच्चा किस वाहन से स्कूल आ रहा है।
- बच्चों को लाने ले जाने वाले सभी वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, पुलिस वेरिफिकेशन करना होगा।
- रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, परमिट, बीमा और पीयूसी प्रमाण पत्र प्रबंधन के पास होना चाहिए।
- स्कूल प्रबंधन यह
सुनिश्चित करें कि प्रत्येक वाहन से निर्धारित संख्या में बच्चों का परिवहन किया जाए।

स्कूल संचालकों को यह करना होगा
परिवहन आयुक्त डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने जारी किए आदेश के मुताबिक अब कोई भी वाहन एलपीजी से नहीं चलेंगे। कोई भी बच्चा इस तरह के वाहन से स्कूल न आए, इसकी निगरानी स्कूल प्रबंधन को ही करनी होगी। इस तरह के वाहन से अगर कोई भी बच्चा स्कूल आता है तो इसकी जानकारी प्रबंधन द्वारा पुलिस या फिर परिवहन विभाग को तत्काल देनी होगी। एलपीजी से संचालित वाहन से किसी भी तरह की दुर्घटना होगी तो इसके लिए स्कूल प्रबंधन जिम्मेदार होगा। निर्धारित संख्या से अधिक बच्चे नहीं बैठे होने चाहिए। ट्रस्ट और समिति के नाम पर शैक्षणिक संस्थानों में चलने वाले वाहन अब प्राचार्य के नाम पर अनुबंधित होंगे।

बसों के लिए तय किए मापदंड
स्कूल बसों की रफ्तार 40 किमी प्रति घण्टा होनी चाहिए। स्पीड गवर्नर से स्पीड फिक्स करनी होगी। दरवाजों पर लगे ताले ठीक होने चाहिए। किसी भी शिक्षक या फिर पालक सुरक्षा का मुआयना करने के लिए बस में जाने की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। चालक को नेत्र परीक्षण के साथ ही स्वास्थ्य परीक्षण कराना होगा।
नियमानुसार छह माह के भीतर वाहन चालकों का स्वास्थ्य
परीक्षण कराना होगा। सुनीश्चित करानी होगी।

बस में स्कूल का नाम व नम्बर होना चाहिए
प्रत्येक स्कूल बस में अनिवार्य रूप से प्राथमिक चिकित्सा के लिए फस्र्ट एड बॉक्स की व्यवस्था होनी चाहिए। खिड़कियों में आड़ी ग्रिल होनी चाहिए। बस पर बड़े अक्षरों में स्कूल का नाम और नम्बर लिखा होना चाहिए। अग्निशमन यंत्र रखना होगा। बच्चों के बैग रखने के लिए सीट के नीचे जगह होनी चाहिए। दो दरवाजे एवं आपातकालीन खिडक़ी होनी चाहिए।
पांच साल का अनुभव
बस चालक के पास भारी वाहन चलाने का कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए। वाहन चालक पूर्व में ट्रैफिक नियमों का दोषी नहीं होना चाहिए। केंद्रीय मोटरयान नियम 1989 के नियम 17 के प्रावधानों के अनुसार बस के वाहन चालक के अतिरिक्त एक अन्य वयस्क
व्यक्ति भी हो।

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