Shortage of manure: होड़ से बना कृत्रिम संकट, एक रैक पहुंची, तीन रैक लाइन पर

Shortage of manure: किसानों को जरूरत के हिसाब से लेने को कहा

By: prabha shankar

Updated: 26 Jun 2020, 06:09 PM IST

छिंदवाड़ा/ खरीफ सीजन में फसल बोआई के बाद लगने वाले यूरिया की अभी से जमा करने की होड़ से कृत्रिम संकट बन गया है। इससे किसान कहीं-कहीं कालाबाजारी में खरीदने पर मजबूर हैं। इस बीच गुरुवार को कृभको की तीन हजार मीट्रिक टन का रैक लेकर ट्रेन पहुंची जबकि तीन ट्रेन दक्षिण भारत से यूरिया लेकर पहुंच रहीं हंै। कृषि विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि इससे किसानों के समक्ष यूरिया की किल्लत खत्म हो जाएगी।
जिले के ग्रामीण अंचल में इस समय मक्का, सोयाबीन समेत अन्य फसलों की बोवाई की जा रही है। इस दौरान यह अफवाह फैल गई है कि कोरोना संकट की वजह से यूरिया की किल्लत होगी। ऐसे में किसान फसल में तीन टाइम यूरिया की जरूरत को नजरंदाज कर जैसे-तैसे यूरिया के जुगाड़ में लगा है। इसका लाभ प्राइवेट दुकानदार बढ़ी कीमत पर बेचकर उठा रहे हैं।

मक्का का रकबा कम, फिर ज्यादा मांग
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में मक्का का रकबा तीन लाख हैक्टेयर से सिमटकर 2.50 लाख हैक्टेयर हो गया है। पिछले साल भी इस समय 30 हजार मीट्रिक टन यूरिया दिया गया था। फिर इस बार रकबा कम होने पर इतनी ही मात्रा यूरिया बांटा गया है। फिर यूरिया की ज्यादा मांग कैसे बढ़ गई? इससे कालाबाजारी के संकेत मिल रहे हैं।

इनका कहना है
खरीफ सीजन में यूरिया की जरूरत बोवाई के बाद की है। जिले में गुरुवार को कृभको की यूरिया रैक पहुंची। तीन ट्रेन दक्षिण भारत से आ रहीं हैं। इससे जिले को 13 हजार मीट्रिक टन यूरिया मिलेगी। किसानों को धीरज रखकर जरूरत के मुताबिक उसे लेना चाहिए।
जेआर हेडाऊ, उपसंचालक कृषि

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