कभी स्कूल कैम्पस तो कभी बीच सडक़ पार्क किए जाते हैं भारी वाहन

ट्रांसपोर्ट नगर की कमी से उपज रही अराजकता

By: prabha shankar

Published: 27 Sep 2021, 10:55 AM IST

छिंदवाड़ा। नगर निगम की सीमा में कुसमेली क्षेत्र में 27 एकड़ में बनने वाले ट््रांसपोर्ट नगर के लिए वर्षों से महज कागजी खानापूर्ति हो रही है। इसके चलते बाहर से आने वाले ट्रक एवं लोडिंग-अनलोडिंग के लिए तैयार माल वाहनों को या तो सडक़ पर जगह मिलती है या फि र समीप के संस्थानों के खुले परिसर में।
ट्रांसपोर्ट नगर को बसाने के लिए वर्षों से चल रही प्रक्रिया को गति तभी मिलेगी जब निगम द्वारा निर्धारित भूमि का सीमांकन हो जाएगा, लेकिन किसी न किसी वजह से यह छोटी सी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इसके लिए नगर निगम की प्रत्येक टीएल बैठक में निगम आयुक्त हिमंाशु सिंह कार्यपालन यंत्रियों, सहायक यंत्रियों को निर्देश जारी करते हैं, लेकिन स्थिति वही जस की तस बनी रहती है। ज्यादातर ट्रक कुंडीपुरा थाने के सामने ही खड़े रहते हैं। इससे ओवर टेक करने के लिए अन्य वाहनों के पास जगह बहुत कम रह जाती है। वहीं ये ट्रक चालक कहीं भी स्टोव-गैस लेकर खाना बनाने बैठ जाते हंै।

स्कूल परिसर में पहुंच जाते हैं ट््रक
कुसमेली मंडी के आसपास गोदामों एवं मंडी से लोडिंग करने वाले ट्रकों का जमावड़ा कुसमेली स्थित शंकर कॉलोनी के प्राथमिक स्कूल परिसर में लग जाता है। विद्यालय की प्रधानाचार्य मीता रघुवंशी ने बताया कि सुबह दस बजे जब स्कूल खुलता है तो उसके पहले तक ट्रक खड़े रहते हैं। सुबह कई बार सफाई के दौरान परिसर में कांच की बोतल के टुकड़े, सिगरेट एवं पानी के पाउच मिलते हैं। एक बार तो एक ट्रक चालक स्कूल खुलने के समय विद्यालय के हैंडपंप पर नहाते हुए भी मिला। बता दें कि विद्यालय में तीन महिला शिक्षक हैं। इन्हें स्कूल के 85 विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ-साथ अन्य दायित्व भी निभाने पड़ते हैं।

मंडी में एक हम्माल की हो चुकी है मौत
कुसमेली मंडी में दिसम्बर 2019 में ट्रक के नीचे आने से एक हम्माल की मौत हो चुकी है। हम्माल तुलावटी संघ प्रतिनिधि सुनील डेहरिया ने बताया कि यदि वह ट्रक अनावश्यक ही मंडी परिसर में लोडिंग की बारी के लिए इंतजार करता हुआ खड़ा नहीं होता तो ऐसी दुर्घटना नहीं होती।

इनका कहना है
जमीनी आवंटन की कार्रवाई करने का निर्देश हर बार दिया जाता है। जमीन का सीमांकन करवाना है। नजूल भूमि निवर्तन नियम 2020 के तहत आवेदन करने के लिए निर्देश दिया जाता है, लेकिन कभी किसी की हड़ताल से तो कभी किसी अन्य कारण से आगे की कार्रवाई रुक जाती है।
हिमांशु सिंह, आयुक्त नगर निगम

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