हांगकांग की नौकरी छोड़ स्वदेश लौटी यह युवती, इस तहर बदलेगी भारत की तस्वीर

कन्याकुमारी से श्रीनगर तक का पैदल सफर उद्देश्य महिलाओं को जागरूक करना

By: prabha shankar

Published: 04 Jan 2018, 10:59 AM IST

छिंदवाड़ा/पांढुर्ना. एक महिला ने विदेश में रहते हुए भारत देश में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को गम्भीरता से लेते हुए स्वदेश लौटकर इस विषय पर जनजागरण का रास्ता अपनाया। परिवार का साथ मिला तो वह कन्याकुमारी से श्रीनगर तक पैदल सफर तय करने निकल पड़ी। हम बात कर रहे हैं देहरादून में रहने वाली सृष्टि बख्शी की, जो हांगकांग में अपनी नौकरी को छोडक़र भारत की गम्भीर समस्या से निपटने के लिए पैदल यात्रा पर निकली हैं।
इस यात्रा के दौरान पांढुर्ना पहुंचने पर सृष्टि ने पत्रिका को बताया कि हांगकांग में रहने के दौरान उन्हें भारत में हो रही महिला उत्पीडऩ के मामलों ने व्यथित कर दिया था। दिल्ली का गैंगरेप हो या पिता भाई के सामने एक युवती के दुष्कर्म की घटना, इससे वह दहल उठी थीं। विदेश में इन घटनाओं को लेकर भारत की लगातार साख भी कम हो रही है। इसी को ध्यान में रखकर सृष्टि ने विदेश की नौकरी छोडक़र भारत में महिलाओं को उनके अधिकार बताने और स्वरोजगार की दिशा में जागरूक करने की ठान ली। सृष्टि ने राष्ट्रीय महिला आयोग के साथ मिलकर इस यात्रा की शुरुआत की है।

सृष्टि ने बताया कि मध्यप्रदेश छठवां ऐसा राज्य है जहां से वह पैदल यात्रा कर रहीं हैं। करीब 3800 किमी की इस यात्रा को वे 260 दिनों में खत्म करेंगी। इस पैदल यात्रा में उनके साथ 10 लोगों की टीम है। यात्रा के दौरान वे ग्रामीण महिलाओं पर फोकस कर रहीं हंै। वे हर जिले के एक स्कूल में महिलाओं के साथ कार्यशाला आयोजित कर रहीं हैं। इसमें वे महिलाओं को हिंसा के प्रति कानून की जानकारी देकर इनका सामना करने के लिए जागरूक बना रहीं हैं। साथ ही इंटरनेट से रोजगार ? प्राप्त करने और फाइनेंस के लिए किस प्रकार से सरकार की मदद ले इस बारे में जानकारी दे रहीं हैं।

सरकार के साथ एकत्रित करेंगी संस्थाओं को
सृष्टि ने बताया कि यात्रा पूरी करने के बाद वे राष्ट्रीय महिला आयोग के साथ मिलकर महिला हिंसा को खत्म करने में सरकार की मदद करेंगी। वे कहती हंै कि देश में हजारों संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही है, जरूरत है इन्हें एकत्रित करने की ताकि सही दिशा में काम किया जा सकेगा। अपनी यात्रा के दौरान सृष्टि एक डॉक्यूमेंट्री पर भी काम कर रहीं हैं, जिसे यात्रा के बाद सरकार को सौंपा जाएगा।

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