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छिंदवाड़ा

Story of wheat: जमाखोरी रोकने पर ध्यान नहीं, लिमिट तय कर कंट्रोल चाहती है सरकार

– केंद्र सरकार के पोर्टल से ही स्टॉकिस्ट पर पूरा नियंत्रण
– जमाखोरों के गोदामों पर नहीं पड़ रहे छापे

छिंदवाड़ाJun 28, 2024 / 11:40 am

prabha shankar

wheat

Complete control over stockists from central government portal

गेहूं के बढ़ते दामों पर कंट्रोल करने केंद्र सरकार ने केवल सरकारी लिमिट तय कर दी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जमाखोरी रोकने के अधिकार प्रशासन को नहीं दिए हैं। इससे स्टॉकिस्ट व्यापारियों के गोदामों की जांच नहीं हो पा रही है। छापे भी नहीं लग रहे हैं। इससे गेहूं के बाजार मूल्य पर नियंत्रण के प्रयास नाकाफी दिख रहे हैं।
देखा जाए तो वर्ष 2022 के रुस-यूक्रेन युद्ध के समय से ही गेहूं के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। बाजार की मांग ज्यादा होने से दो साल 2023-24 में सरकार को समर्थन मूल्य पर गेहूं नहीं मिल पाया। इससे राशन दुकानों में रियायती दर पर गेहूं का पर्याप्त वितरण न होने से जरूरतमंद परिवार भी बाजार पर आश्रित हो गए। बाजार से मांग से भाव बढ़ते गए। मांग-आपूर्ति में संतुलन बिगडऩे से जमाखोरी भी बढ़ी। हालात यह हो गए कि वर्तमान में गेहूं के दाम पर कंट्रोल करने सरकार को हर स्टॉकिस्ट की लिमिट तय करनी पड़ी। इस स्टॉक लिमिट से गेहंू के दामों में इस समय उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
सरकारी लिमिट से आम जनमानस को गेहूं के दाम में राहत की उम्मीद है लेकिन वे इस प्रयास को नाकाफी मान रही है। उनके मुताबिक जमाखोरी रोकने नियमित स्टॉकिस्ट के गोदामों की जांच होनी चाहिए। साथ ही सरकार को दूसरे देशों से गेहूं आयात की योजना पर विचार करना चाहिए।

पिछले साल से स्टॉक सीमा, चैकिंग के अधिकार नहीं

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक आपूर्ति विभाग ने दो जून 23 को व्यापारियों के स्टॉक की सीमा निर्धारित की थी। यदि स्टॉक में अधिक माल है तो उसे 30 दिन के भीतर निर्धारित सीमा में लाना होगा। इस साल गेहूं के दाम कंट्रोल करने की दृष्टि से इसी माह गेहूं को इस दायरे में लाया गया है। इस कानून में समस्या यह है कि केंद्र सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए कानून बनाया है लेकिन ऐसे लोगों पर कार्रवाई का अधिकार किसके पास यह स्पष्ट नहीं किया है। इस वजह से राज्य के खाद्य एवं जिला आपूर्ति अधिकारी कार्रवाई को लेकर कुछ नहीं कर पा रहे हैं। यदि कोई ट्रेडर्स जमाखोरी करता है तो उससे स्थानीय स्तर पर पूछताछ और जांच नहीं हो पा रही है।

दाल-चावल और सब्जियों पर भी मार

पिछले तीन महीने में दाल-चावल आटा, शक्कर, तेल से लेकर मसालों तथा सब्जियों तक के दाम में बेतहाशा वृद्धि हुई है। ऐसे में आम आदमी का घर चलाना मुश्किल हो गया है। फुटकर कारोबारी दबी जुबान में इसके लिए जमाखोरी को बड़ा कारण मानते हैं। उनका कहना है कि यदि ऊपर से ही दाम कम होकर मिले तो बाजार में भी रेट नीचे ही बने रहेंगे। जुलाई में भी तेजी रहने का अनुमान है।

महंगाई का कारण

देखा जाए तो हर खाद्य सामग्री के दामों के बढऩे के पीछे का बड़ा कारण जमाखोरी और माल का स्टॉक करना ही है। इस पर लगाम लगाने प्रशासन के पास कोई शक्ति नहीं है। इसके चलते हर सामग्री पर महंगाई की मार देखी जा रही है।

इनका कहना है

स्टॉक लिमिट लागू होने पर शहर के रजिस्टर्ड व्यापारी गेहूं समेत अन्य अनाज की सीधे जानकारी भारत सरकार के पोर्टल में अपलोड करते हैं। वहां से स्टॉक में अंतर आने पर ही जांच हो रही है। कानून में हमें कार्रवाई का अधिकार नहीं है।
-जान कुजूर, जिला आपूर्ति अधिकारी

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