विधिक सहायता उपलब्ध कराना राज्य का दायित्व

विधिक सहायता उपलब्ध कराना राज्य का दायित्व

Rajendra Sharma | Publish: Nov, 10 2018 11:27:07 AM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 11:27:08 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

बीएसडब्ल्लू के विद्यार्थियों ने मनाया विधि दिवस

छिंदवाड़ा. विधि किसी नियम संहिता को कहते है। विधि प्राय: भली- भांति लिखी हुई संसूचकों के रुप में होती है। समाज को सम्यक ढंग से चलाने के लिए विधि अत्यंत आवश्यक है। विधि मनुष्य के आचरण के वे सामान्य नियम होते हैं जो राज्य द्वारा स्वीकृत तथा लागू किए जाते है और जिनका पालन अनिवार्य होता है। पालन न करने पर न्यायपालिका दण्ड देता है।
यह जानकारी बिछुआ में विधि दिवस के अवसर पर समाज कार्य में अध्ययनरत विद्यार्थियों को दी गई। विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष वीएस भदौरिया, सचिव विजय सिंह कावछा के निर्देशन में और विधिक सहायता अधिकारी सोमनाथ राय के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम हुआ। पैरालीगल वालेंटियर श्यामल राव ने छात्रों को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 14 के निहित सामान्य न्याय की अवधारणा तभी साकार होगी जब शैक्षिक, आर्थिक या किसी अन्य अक्षमता से पीडि़त व्यक्ति को भी न्याय सहज और सुलभ होगा। उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा अनुच्छेद 39 ए में वर्णित नीति निर्देशित तत्वों में विधिक सहायता उपलब्ध कराना राज्य का प्राथमिक दायित्व भी है। उन्होनंे आम व्यक्ति को विधिक साक्षरता का ज्ञान होने की बात कही।

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