इन तीन लोगों की वजह से बची कुएं के मलबे में दबे सुभाष की जान

रोशन पराडकर ने सबसे पहले अरूण चौधरी और दिलीप घागरे को रस्सी के सहारे कुंए में उतारा था। इन दोनों किसानों ने जान की परवाह किये बिना किसान पर गिरी फाडिय़ा को हटाकर उसकी सुध ली।

By: Sanjay Kumar Dandale

Published: 01 Jul 2019, 06:20 PM IST

पांढुर्णा . ग्राम मालेगांव में 24 जून को कुएं के मलबे के नीचे दबे किसान सुभाष को बाहर निकालने में कई लोगों ने अपनी ताकत लगा दी लेकिन इस काम में तीन लोगों चर्चा में है।
जानकारी के अनुसार मालेगांव में खेत के कुएं में जब किसान फंसा तो सबसे पहले इस घटना की सूचना ग्राम पंचायत पारडी के सरपंच रोशन पराडक़र को दी गई थी जिन्होंने घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य की तेजी से शुरुआत की थी। रोशन पराडकर ने सबसे पहले अरूण चौधरी और दिलीप घागरे को रस्सी के सहारे कुंए में उतारा था। इन दोनों किसानों ने जान की परवाह किये बिना किसान पर गिरी फाडिय़ा को हटाकर उसकी सुध ली। किसान को बाहर निकालने के लिए शुरू किए गए रेस्क्यू में मलबा हटाने के दौरान वापस मलबा जब किसान पर गिरने लगा तब सरपंच पराडक़र ने ही हाईड्रा मशीन बुलाकर बचाव कार्य की शुरुआत की जिसके बाद कुएं के मलबे में फंस किसान को रस्सियों के सहारे सुरक्षित रखकर बचाव कार्य को अमली जामा पहनाया गया।
प्रशासन जिला से मदद मांग रहा था लेकिन इस दौरान किसान को बाहर निकालने के लिए उक्त तीनों किसान गांव वालों के साथ पूरी जद्दोजहद के साथ भिड़े हुए थे। एनडीआरएफ की टीम ने देर शाम को प्रयास शुरू करते हुए अपनी सूझबूझ के साथ उठाए गये कदमों से दूसरे दिन किसान को बाहर निकालने में सफलता पाई। गांव वालों का कहना है कि जितने सफल प्रयासों के लिए एनडीआरएफ और प्रशासन की पीठ थपथपाई जा रही है उतनी ही प्रशंंसा के काबिल तीनों के साथ-साथ कई गांव वाले भी है।

 

Sanjay Kumar Dandale
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned