Talent: 170 किलो कागज पर लिख डाली श्रीरामचरित मानस, बनाया यह रिकॉर्ड

149 दिनों यानी लगभग पांच माह में लिखा है।

By: ashish mishra

Updated: 12 Jul 2021, 12:03 PM IST


छिंदवाड़ा. मोहखेड़ के बदनूर निवासी डॉ. अरुण कुमार खोबरे का नाम विश्व की सबसे बड़ी श्रीरामचरित मानस लिखने पर विश्व रिकार्ड के लिए में प्रसिद्ध ओएमजी बुक ऑफ रिकाड्र्स ने दर्ज कर लिया है। डॉ. अरुण द्वारा हस्तलिखित इस श्रीरामचरित मानस की खासियत ये है कि इसके कागज का वजन 170 किलो, चौड़ाई 51 इंच, लगभग सवा चार फिट है, जिसे उन्होंने 11 मार्च 2008 से 7 अगस्त 2008 के बीच 149 दिनों यानी लगभग पांच माह में लिखा है। उन्होंने बताया कि हनुमान जी के स्वप्न में दिए दर्शन व उनकी प्रेरणा से ही वे इसे पूर्ण कर पाने में सफल हुए हैं। उन्होंने रिकार्ड बनाने की मंशा से इसे नहीं लिखा था, लेकिन आज तक इस तरह की कोई श्रीरामचरित मानस विश्व में नहीं लिखी गई है, इसलिए ओएमजी बुक ऑफ रिकाड्र्स ने इसे विश्व की सबसे बड़ी श्रीरामचरित मानस के रुप में अपने रिकार्ड बुक में दर्ज किया है। डॉ. अरुण ने कहा कि उनकी इच्छा है कि वे श्रीरामचरित मानस को भगवान शिव की नगरी काशी और भगवान श्रीराम जी जन्मभूमि अयोध्या लेकर जाएं। डॉ. अरुण भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय रामजी, हनुमान जी और अपने माता-पिता को दिया है। डॉ. अरुण को लोग एक कवि, गीतकारए गजलकार और शायर के रुप में भी जानते हैं और उन्हें उनके उपनाम अरुण अज्ञानी के नाम से भी जाना जाता है। लगभग तीन दर्जन से ज्यादा सम्मान, पुरस्कार अरुण प्राप्त कर चुके हैं।

पीले रंग के कागज में लिखी श्रीरामचरित मानस
डॉ. अरुण ने बताया कि श्रीरामचरित मानस गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखी है, इसलिए उन्हें उनके जन्मदिन पर सरप्राइज देने के लिए उन्होंने इसे 11 मार्च को लिखना शुरु किया था। जो कि 149 दिन 7 अगस्त 2008 को पूर्ण हुई, अगले दिन को तुलसीदास जी के जन्मदिन पर अरुण ने इसे उनको श्रृद्धाभाव के साथ समर्पित कर दिया। इतनी वजनी, लंबी व चौड़ी श्रीरामचरित मानस को पीले रंग के कागज पर लाल स्याही के परमानेंट मार्कर से लिखा गया है।

अच्छे कार्य को हमेशा किया जाता है याद
ओएमजी बुक ऑफ रिकार्ड को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉ. अरुण ने कहा कि पद, प्रसिद्धि व पैसा तो आता-जाता है, लेकिन किसी भी व्यक्ति के इस नश्वर दुनियां को छोडकऱ चले जाने के बाद लोग उसके द्वारा किए गए अच्छे कार्यों व उपलब्धियों को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने उन्हें इस लायक समझा और उनके आशीर्वाद से ही वे इसे कर पाएं हैं, इसलिए इसका संपूर्ण श्रेय उन्हीं को जाता है।

ashish mishra Desk
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