टीबी रोग नियंत्रण में जिला प्रदेश में बेहतर...कम नहीं हो रहे मरीज, जानें वजह

- जिले में क्षय रोग के गंभीर प्रकरण हैं 49

By: Dinesh Sahu

Published: 24 Jan 2021, 11:49 AM IST

छिंदवाड़ा/ जिले में टीबी मरीजों की संख्या लगातार बनी हुई हैं, स्थिति यह है कि एमडीआर मरीज (गंभीर अवस्था) के 49 मरीजों का उपचार जारी है। वहीं चिन्हित मरीजों को डॉट दवाओं का डोज भी दी जा रही हैं। क्षय आरोग्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार स्पूटम जांच समेत डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के आठ से नौ बिंदुओं की समीक्षा के मामले में छिंदवाड़ा प्रदेश में 11वें स्थान पर काबिज है।

वर्ष 2020 के आंकड़ों के अनुसार विभाग ने करीब 24 हजार 700 स्पूटम की जांच की हैं। इसकी एक वजह टीबी संदिग्ध मरीजों की जांच के साधनों में सुविधाएं भी बढऩा है। बताया जाता है कि वर्ष 2025 में देश को टीबी मुक्त बनाना है, जिसके लिए शासन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में विभिन्न प्रयास किए जा रहे है और आने वाले समय में जिले को मोबाइल जांच वैन भी उपलब्ध की जा सकती हैं।


अलग-अलग दवाओं के दिए जाते हैं डोज -


चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक टीबी रोग दो तरह का होता है, जिनके उपचार की व्यवस्था भी अलग-अलग होती है। सामान्य टीबी के उपचार के लिए छह महीने का कोर्स होता हैं, जबकि एमडीआर मरीजों का 9 से 11 महीने तक उपचार करना पड़ता है। कई मामले में मरीज की मौत भी हो जाती है।


वर्ष 2020 में यह रही जिले की स्थिति -


विकासखंड लक्ष्य कुल मिले प्रकरण उपलब्धि प्रतिशत
अमरवाड़ा 300 210 70
बिछुआ 160 74 46
छिंदवाड़ा 590 355 60
चौरई 330 153 46
हर्रई 225 122 54
जुन्नारदेव 425 306 72
मोहखेड़ 295 121 41
पांढुर्ना 330 199 60
परासिया 500 331 66
सौंसर 330 158 48
तामिया 215 118 55

जनसंख्या के आधार पर मिलता है लक्ष्य -


विगत तीन वर्षों के टीबी मरीजों के आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले में संख्या कम हुई है तथा स्पूटम जांच में जिले में बेहतर कार्य किया गया है। साथ ही मरीजों की जांच और उपचार के लगातार प्रयास किए जा रहे है।


- डॉ. हर्षवर्धन लोनकर, नोडल अधिकारी, क्षय रोग विभाग छिंदवाड़ा

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