scriptThe forest buzzing due to the intoxication of Mahua, the gangs coming | महुआ की मादकता से गुलजार जंगल,अलसुबह बटोरने निकल रही टोलियां | Patrika News

महुआ की मादकता से गुलजार जंगल,अलसुबह बटोरने निकल रही टोलियां

बटकाखापा से लेकर तामिया और जुन्नारदेव तक चार माह के रोजी-रोटी के इंतजाम में लगे आदिवासी

छिंदवाड़ा

Updated: March 31, 2022 08:55:22 pm

छिंदवाड़ा.आग उगलते सूरज की गर्मी के बीच जंगल महुआ की मादकता से गुलजार हैं। पेड़ों के नीचे हर दिन अलसुबह टपक रहे फूलों को एकत्र करने आदिवासियों की टोलियां निकल रही है। अमरवाड़ा, बटकाखापा से लेकर तामिया, देलाखारी, बम्हनी तथा जुन्नारदेव के गांवों के मकानों में महुआ को सूखते देखा जा सकता है। बाजार में महुआ का वार्षिक टर्न ओवर 5 करोड़ रुपए से अधिक है। इससे लाखों आदिवासी परिवार अपने चार माह की रोजी-रोटी भी जुटा रहे हैं।
सतपुड़ा अंचल के जंगलों में इस समय महुआ के पेड़ बड़ी संख्या में मौजूद हैं। मार्च में होली के बाद महुआ के पेड़ फूलों से लद जाते हैं। जैसे ही तापमान में बढ़ोत्तरी होती है, वैसे ही फूल गिरने लगते हैं। इस साल मार्च में तापमान 37-38 डिग्री पहुंच गया है। इससे पेड़ से फूल तेजी से गिर रहे हैं। इन्हें संग्रहित कर वनवासी पहले उसे सूखा रहे हैं। एक सप्ताह में ये बेर के आकार में बाजार में आ जाएंगे। महुआ सीजन में आग लगने की संभावनाएं भी ज्यादा होती है। इसे रोकने के लिए वन विभाग का दल सक्रिय हैं।
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पश्चिम की दो समितियों को दिए 40 लाख
पश्चिम वनमण्डल की देलाखारी और बम्हनी समिति को महुआ खरीदी के लिए 40 लाख रुपए उपलब्ध कराए गए हैं। पश्चिम के डीएफओ ईश्वर जरांडे का कहना है कि इस समय महुआ पेड़ से गिर रहा है और वनवासी उसे घरों में सुखा रहे हैं। एक सप्ताह में इसकी भरपूर आवक बाजार में होने लगेगी। इस दौरान भाव समर्थन मूल्य के पास आते हैं तो इसकी खरीदी करने के लिए स्थानीय कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है। इस बार विभाग द्वारा पेड़ के नीचे महुआ संग्रहित करने के लिए महुआ नेट भी समितियों को दिए गए हैं।
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जैव विविधता एक्ट में नहीं हुआ व्यापारी पंजीयन
पश्चिम वनमण्डल की वनोपज यूनियन के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र शाह का कहना है कि महुआ सीजन की खरीदी के पहले वन विभाग को जैव विविधता एक्ट के तहत हर व्यापारी का पंजीयन करना चाहिए। यह अभी शुरू नहीं किया गया है। इससे व्यापार के वास्तविक आंकड़े नहीं आ पा रहे हैं। अभी नए महुआ के रेट 40 रुपए किलो बाजार में जरूर खुले हैं लेकिन व्यापारी उसे 30 रुपए में ही खरीद रहे हैं। पुराना महुआ के रेट 65-70 रुपए किलो हैं। इस पर विभाग को हस्तक्षेप करना चाहिए।

महुआ की मादकता से गुलजार जंगल,अलसुबह बटोरने निकल रही टोलियां
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