चिकित्सा विभाग के खोखले दावे...घर में हो रहे प्रसव, जानें वजह

- पिछले छह महीने में 142 प्रकरण घरेलू प्रसव के आए सामने, मातृ-शिशु मृत्यु दर में निकले फिसड्डी

By: Dinesh Sahu

Published: 25 Aug 2020, 12:17 PM IST

छिंदवाड़ा/ जिले का चिकित्सा अमला लोगों को संस्थागत प्रसव कराने में नाकाम साबित हो रहा है, जिसकी वजह से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। स्थिति यह है कि पिछले छह महीने में 142 प्रकरण घरेलू प्रसव के सामने आए है। विभागीय अधिकारी हर बार बेहतर चिकित्सा सेवाएं और सुविधाएं प्रदान करने का दावा करते रहे, पर विभागीय आंकड़ें की उनके दावों को खोखला साबित करती है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय छिंदवाड़ा से मिली जानकारी के अनुसार माह जनवरी से जून 2020 तक जिले में 142 प्रकरण, जबकि सिर्फ जून माह में ही 29 केस घरेल प्रसव के दर्ज किए गए है। दावा किया जाता है कि इस दौरान 6853 डिलेवरी हुई है।


ट्रायबल क्षेत्र की स्थिति ज्यादा खराब -


घरेलू प्रसव के सबसे ज्यादा मामले जिले के आदिवासी क्षेत्र के बताए जाते है। इसमें जुन्नारदेव, हर्रई, तामिया तथा पांढुर्ना विकासखंड शामिल है। संस्थागत प्रसव नहीं कराने की मुख्य वजह उक्त क्षेत्रों में डॉक्टरों का मौजूद नहीं होना बताया जाता है। उल्लेखनीय है कि कई चिकित्सा अधिकारी ऐसे है जो कि मुख्यलय पर कार्य नहीं कर सीएमएचओ कार्यालय में वर्षों से अटैच है तथा ट्रायबल और शहरी दोनों क्षेत्रों का लाभ ले रहे है।


फैक्ट फाइल -


विकासखंड जनसंख्या कुल प्रसव घरेलू प्रसव


अमरवाड़ा 159164 491 13
बिछुआ 87679 225 03
चौरई 189468 458 03
छिंदवाड़ा 190008 2692 00
हर्रई 134893 553 17
जामई 240651 656 60
मोहखेड़ 168299 185 00
पांढुर्ना 192612 352 14
परासिया 284952 444 02
सौंसर 181580 298 00
तामिया 113949 499 30

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