अहंकार की दीवार ही सबसे भारी

पर्वाधिराज पर्युषण

By: sunil lakhera

Published: 05 Sep 2019, 04:53 PM IST

अमरवाड़ा . पर्युषण पर्व राज के अवसर पर तारण तरण दिगंबर जैन चैत्यालय मंदिर जी में सुबह दोपहर शाम रात्रि में संगीत में प्रवचन ओं की श्रंखला में पर्यूषण पर्व के द्वितीय दिवस 10 लक्षण धर्म के उत्तम मार्दव धर्म मन को मारना ही उत्तम मार्दव धर्म की स्वीकार्यता है
पंडित धन कुमार मांस्बाब ने आज तक पर चर्चा में बताया कि अहंकार के भार से मुक्त हुआ व्यक्ति परमात्मा को उपलब्ध होता है अहंकार वह दीवार है जो स्वयं के भीतर नहीं जाने देती अहंकार के ही कारण विवाद है विषाद है बैर भावना है संप्रदाय है संघर्ष होता है और जहां अहंकार है वहां मिलन नहीं हैं मात्र दुख है व्यक्ति के सारे प्रयास मात्र अह मान की पुष्टि करता है मैं याने अहंकार की भावना है उन्होंने बताया कि अहं ठीक उस छिपकली की भावना की तरह जो छत पर चिपक कर रहे सोचती है कि मेरे कारण मेरे बदौलत यह छत टिकी है जिस प्रकार मुर्गा सोचता है की वाग नहीं दूंगा तब तक सवेरा नहीं होगा यही अहंकार की भावना मनुष्य को उठने नहीं देती है।
उत्तम क्षमा धर्म की हुई आराधना- परासिया में पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के अवसर पर प्रथम दिवस उत्तम क्षमा धर्म को समझने और अपने जीवन में उतारने हेतु प्रयोग करने की बात पं. ज्ञायक शास्त्री द्वारा कही गई। उन्होंने कहा कि धर्म अनुकूलता में समझा जाता है और प्रतिकूलता में पालन किया जाता है। इसके पूर्व सकल तारण तरण जैन समाज द्वारा तारण झंडा आरोहण करते हुए झंडा वंदन किया गया। संगीतमय वृहद मंदिर विधि उपरांत प्रसाद वितरण किया गया। संध्याकालीन मन्दिर विधि उपरान्त पं. ज्ञायक शास्त्री द्वारा तारण स्वामीजी विरचित ग्रंथों की प्रथम गाथा मंगलाचरण पर प्रकाश डाला गया।

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