अक्षय तृतिया पर ये बने विशेष व्यंजन

मिट्टि के कलशों का पूजन कर हुआ विशेष आयोजन

By: sandeep chawrey

Published: 19 Apr 2018, 03:02 PM IST

छिंदवाड़ा. वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया की तिथि अक्षय तृतीया या अखा तीज के रूप में बुधवार को मनाई गई। हिंदू पंचांग के अनुसार ग्रीष्म काल की यह महत्वपूर्ण तिथि है। बुधवार के दिन सुबह स्नान ध्यान कर शुद्ध मन के साथ घरों में मिट्टी का नया घड़ा लाकर उसमें पानी भरकर पूजा की गई। कच्चे आम का पना और सत्तू बनाकर उसका भोग भगवान को लगाया गया और परिवार के सभी सदस्यों ने उसका सेवन भी किया। एेसा माना जाता है कि इस तिथि के बाद सूर्य की तपन और तेज होती है यानि गर्मी चरम पर होती है इसलिए शरीर में शीतलता आए इसलिए मिट्टी के घड़े में हुए ठंडा पानी का सेवन आज ही से किया जाता है। सत्तू और पना भी गर्मी के ही भोज्य पदार्थ है इसलिए इन्हें आज खास तौर पर बनाया जाता है। इस दिन बिना किसी मुहूर्त समय के मांगलिक और धार्मिक कार्य घरों में किए गए। आज ही के दिन भगवान परशुराम का जन्म भी हुआ था इसलिए यह तिथि परशुराम जयंती के नाम से भी जानी जाती है। शहर में विप्रजनों ने अपने आराध्य की जयंती पर उनकी पूजा अर्चना की। आज के ही दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ भी माना गया है। एेसा कहा जाता है कि आज के दिन जिनका परणिय संस्कार होता है उनका सौभाग्य अखंड होता है यही कारण है इसदिन विवाह के आयोजन सबसे ज्यादा होते हैं। शासकीय स्तर पर विशेष विवाह सम्मेलनों के साथ शहर में कई समाजों ने आज सामूहिक विवाह के आयोजन किए। चंदनगांव में पवार समाज ने तो गोदड़देव में किरार समाज ने आदर्श विवाह संपन्न कराए। जलपात्रों का किया वितरण जैन युवा फेडरेशन औरा सतपुड़ा साइं्रस क्लब ने मिलकर बुधवार को शहर के सकूल, प्रतिष्ठानों के साथ स्वजनों को जलपात्रों का वितरण किया। यह पात्र पक्षियों केा गर्मी के दिनों में पानी उपलब्ध कराने के लिए दिए गए हैं। सामाजिक संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारियों और युवाओं ने लोगों को जल पात्र देकर पशु पक्षियों को दाना पानी देने का अनुरोध किया।
मां पीतांबरा महायज्ञ आज से
गुरैया स्थित मां पीतांबरा बगुलामुखी मंदिर में महायज्ञ गुरुवार से प्रारंभ होगा। हर वर्ष अक्षय तृतीया के मौके पर यह आयोजन किया जाता है। मंदिर के गुुरुजी पं संजय भार्गव ने बताया कि १९ अप्रैल से २५ अप्रैल तक महायज्ञ और महारुद्राभिषेक किया जाएगा। प्रतिदिन सुबह ७ बजे से ११ बजे तक रुद्राभिषेक और दोपहर ३ बजे से शाम ७ बजे तक मां पीतांबरा सहस्त्रनाम हवन यज्ञ जप किया जाएगा। मां पीताम्बरा के जन्मोत्सव पर २३ अप्रैल को महाआरती का आयोजन किया गया है।

 

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