फट्टियां-बैनर उठाते आ गई सफेदी पर टिकट..!

फट्टियां-बैनर उठाते आ गई सफेदी पर टिकट..!

manohar soni | Publish: Nov, 10 2018 11:44:22 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

जुन्नारदेव,चौरई,छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा थे दावेदार,टिकट व नामांकन के बाद अंदर ही अंदर झुंझला रहे नेता



छिंदवाड़ा.पार्टी के झण्डे-बैनर लगाने,फट्टियां उठाने और नारे लगाने में कुछ नेताओं ने पूरी उम्र लगा दी पर उन्हें कभी विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं मिला। चाहे भाजपा या फिर कांग्रेस के कर्ताधर्ताओं के इस व्यवहार से एेसे पदाधिकारी झुंझलाते नजर आए तो कुछ ने हिम्मत कर नेतृत्व के समक्ष विरोध भी जाहिर किया। कुछ नामांकन भरकर अभी मैदान में आ गए हैं।
इस विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक विरोध जुन्नारदेव विधानसभा क्षेत्र में सामने आया, जब भाजपा ने विधायक नत्थन शाह कवरेती का टिकट काट दिया और अधिकृत प्रत्याशी आशीष ठाकुर को घोषित कर दिया। इससे नत्थन शाह का नाराज होना स्वाभाविक था लेकिन पार्टी के अन्य दावेदार और पदाधिकारी नाराज हो गए। उनका कहना था कि पार्टी के झण्डे,बैनर लगाने,फट्टियां उठाने समेत अन्य संगठनात्मक कामकाज में जिन लोगों ने उम्र लगा दी,उन्हें पार्टी नेतृत्व ने टिकट के लिए नहीं पूछा। विदिशा में रहनेवाले व्यक्ति को टिकट दे दी। ये लोग भाजपा जिलाध्यक्ष तक विरोध के स्वर उठाने तक सीमित हो गए। विधायक नत्थन शाह ने अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ नामांकन भर दिया। यहीं हालत कांग्रेस की थी। यहां दोबारा सुनील उइके को टिकट देने के खिलाफ कुछ दावेदारों ने हिम्मत जुटाई। एक दावेदार अरूण परते ने नामांकन भर दिया। अरूण लम्बे समय से कांग्रेस के लिए काम करनेवाले कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं। इस विधानसभा में तामिया,दमुआ और जुन्नारदेव में इमानदार कार्यकर्ताओं की कमी नहीं थी। फिर भी उन्हें कभी महत्व नहीं दिया गया।
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टिकट की आस में आ गई सफेदी
छिंदवाड़ा विधानसभा में कांग्रेस के अंदर विश्वनाथ ओक्टे का प्रकरण मौजूं हैं। ओक्टे कांग्रेस टिकट के लिए हर प्रयास करते रहे लेकिन नेतृत्व ने उनकी नहीं सुनी। इसके अलावा एक और वरिष्ठ नेता की टिकट मांगते-मांगते सिर में सफेदी आ गई। उनको भी हमेशा खारिज किया गया। इसके अलावा और भी नेता केवल झण्डे-बैनर लगाते,नारे लगाते और फट्टियां उठाते-उठाते जी हुजूरी तक सीमित हो गए। भाजपा में भी यहीं हाल रहा। युवा तुर्क समेत अन्य दावेदारों ने टिकट बदलाव का झण्डा उठाया। फिर भी उन्हें महत्व नहीं दिया गया। मजबूरी में उन्हें एक झण्डे के नीचे आना पड़ा। दो बुजुर्ग नेता भी इस बार टिकट मांगते नजर आए।
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चौरई में तैयारी रह गईं धरी की धरी
चौरई विधानसभा में कांग्रेस के पूर्व जिला पंचायत सदस्य के अलावा पांच नेताओं ने पूरे पांच साल पार्टी का झण्डा,बैनर उठाए और कई जनहितैषी आंदोलन किए। पार्टी संगठन को मजबूत करने के हर प्रयास किए लेकिन टिकट की बारी आई तो ये सब किनारे हो गए। पूर्व विधायक स्व.मेरसिंह के पुत्र सुजीत सिंह चौधरी को नया चेहरा बनाकर ले आया गया। वे पहले एक शिक्षक थे। इस तरह की राजनीति से दूसरे दावेदार अंदर से खून के आंसू रोते रहे। भाजपा में भी दूसरे दावेदारों को खारिज कर दिया गया।
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सौंसर व पांढुर्ना में भी वरिष्ठ नेता खारिज
सौंसर विधानसभा में भी कांग्रेस टिकट में कई दावेदार खारिज कर दिए गए। पूर्व विधायक अजय चौरे का दावा मजबूत था जिन्होंने पांच साल तक ओबीसी आंदोलन किए और किसानों की लड़ाइयां लड़ी। इसके अलावा दूसरे नेता भी लाइन में लगा दिए गए। पांढुर्ना में भाजपा ने पार्टी के कुछ मजबूत दावेदारों को खारिज किया। ये भी पार्टी के प्रति समर्पित थे। ....
अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ भरा नामांकन
जुन्नारदेव विधानसभा
कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार सुनील उइके के खिलाफ अरुण परते। भाजपा उम्मीदवार आशीष ठाकुर के खिलाफ पूर्व विधायक नत्थन शाह।
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परासिया विधानसभा
भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी ताराचंद बावरिया के खिलाफ सुखनंदन जावरे,संतोष डेहरिया ।
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पांढुरना विधानसभा
भाजपा अधिकृत प्रत्याशी टीकाराम कोराची के खिलाफ पूर्व विधायक रामराव कवडेती,दादूराम,श्याम धुर्वे।
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