सरकारी अस्पताल में तंगी...नहीं मिल रहे ग्लब्स-हैंडवॉस, जानें वजह

- उपकरणों को भी चालू रखने अटेंडरों से मांग रहे बैटरी सेल, विभागीय और मरीज दोनों की मजबूरी नहीं समझ रहे जिम्मेदार, शिकायतें भी बेअसर

By: Dinesh Sahu

Published: 11 Jan 2021, 09:37 AM IST

छिंदवाड़ा/ छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस से सम्बद्ध जिला अस्पताल का गायनिक विभाग संक्रमण से सुरक्षा देने वाले मटेरियल की कमी से जूझ रहा है। स्थिति यह है कि विभागीय कर्मियों को पर्याप्त संख्या में हैंड ग्लब्स मिल रह न ही हैंडवॉस मटेरियल, कोरोना महामारी के बीच सेनेटाइजर प्रदान किया जा रहा है।

इसकी वजह से मजबूरी में मरीज के अटेंडरों से ग्लब्स और ब्लडप्रेशर नापने की मशीन को चालू रखने के लिए बैटरी सेल भी मंगाए जा रहे है। यह स्थिति विगत कई सप्ताह से बनी हुई है, जिसकी शिकायत विभागीय कर्मचारियों द्वारा भी की गई। लेकिन नतीजा अब तक बेअसर साबित हुआ है।

बताया जाता है कि हर सप्ताह स्टोर से विभिन्न मटेरियल के लिए इंडेन किया जाता है, पर मांग के अनुरूप मटेरियल नहीं मिलने से उक्त स्थिति निर्मित होती है। मरीजों के परिजन द्वारा विरोध करने पर स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा संक्रमण से सुरक्षा और मजबूरी का हवाला दिया जाता है, जिसे समझकर लोग बाजार से खरीदकर मटेरिलय उपलब्ध करा देते है।


चार मरीजों की जांच में दम तोड़ देते है सैल -


शासन के निर्देश पर शासकीय चिकित्सा संस्थाओं में पारा युक्त बीपी उपकरण के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया तथा उसके स्थान पर इलेक्ट्रानिक मशीन का उपयोग किया जाता है, जिसके लिए पांच पेंसिल सैल लगाए जाते है। हालांकि चार्जिंग बैटरी भी मशीन में लगी होती है, पर गुणवत्ता उचित नहीं होने से वह भी उपयोगी नहीं होती है। इधर चार से पांच मरीजों की जांच के बाद सैल दम तोड़ देते है और जांच परिणाम में भी अंतर आने लगता है। ऐसे में गायनिक मरीज का सही बीपी नहीं नापा गया तो उपचार में दिक्कतें आती है।


हैंडवॉस मटेरियल मिलना हुआ बंद -


विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि हैंडवॉस को लेकर शासन कितना सजग रहने को कहता है तथा बार-बार हाथ धोने की हिदायत भी दी जाती है। लेकिन जब से कोरोना काल आया है सिर्फ हैंड सेनेटाइजर दिया जा रहा है, जबकि पहले साबुन, हैंडवॉस लिक्विड समेत अन्य सामग्री दी जाती थी।


एक मरीज पर कम से कम दस जोड़ी होते है उपयोग -


बताया जाता है गायनिक विभाग में प्रतिदिन करीब 50 की ओपीडी और औसत 25 डिलेवरी होती है। इनमें कुछ प्रकरण सीजर तो कुछ सामान्य प्रसव के शामिल है। सामान्य में तो किसी तरह काम चला लिया जाता है। लेकिन सीजर प्रकरण में एक डॉक्टर, दो नर्स, एक आया की मौजूदगी रहती है, जिसके लिए कम से कम दस ग्लब्स लगते है और बार-बार हाथ धोने पड़ते है। एक दिन में सीजर और सामान्य प्रसव करने पर करीब 300 ग्लब्स का उपयोग हो जाता है, जबकि स्टोर से एक सप्ताह के लिए 1000 ग्लब्स दिए जाते है।


फैक्ट फाइल -


1. गायनिक विभाग में एक वर्ष भर्ती हुए कुल मरीजों की संख्या - 12554
2. माह जनवरी से दिसम्बर 2020 तक कुल डिलेवरी की संख्या - 10324
3. एक वर्ष में किए गए सामान्य प्रसव की संख्या - 7263
4. एक वर्ष में किए गए सीजर ऑपरेशन की संख्या - 3061
5. वर्ष 2020 में गायनिक विभाग में उपचार के दौरान प्रसूताओं की मौत - 17

आपूर्ति कम होने से कई बार बिगड़ती है व्यवस्थाएं -


ग्लब्स, हैंडवॉस लिक्विड रोटेड मटेरियल है, जो बहुत अधिक संख्या में उपयोग होते है और आपूर्ति कम होने से अक्सर व्यवस्थाएं बिगड़ती है। ऐसा ही उपकरणों के लिए भी हो जाता है। हैंडवॉस लिक्विड की सप्लाई शीघ्र होने लगेगी, जिसके बाद उक्त शिकायतें भी नहीं आएगी।


- डॉ. पी. कौर गोगिया, सिविल सर्जन

जांच कराएंगे तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाईकरेंगे -


अस्पताल में सहायक मटेरियल की कमी के मामले की जांच कराएंगे तथा मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


- सौरभ कुमार सुमन, कलेक्टर छिंदवाड़ा

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