वक्त गुजर जाएगा... बस याद रह जाएंगे लॉकडाउन के जख्म

बस-टैक्सी संचालन शुरू होने की सरकारी घोषणा से भी खुश नहीं ड्राइवर-कंडक्टर : चार जून को प्रशासन को सुनाएंगे व्यथा
दो माह से काम ठप होने से आर्थिक संकट ग्रस्त, फौरी राहत मिलने के आसार कम

By: Rajendra Sharma

Published: 02 Jun 2020, 06:10 PM IST

छिंदवाड़ा/ राज्य सरकार ने भले ही सार्वजनिक परिवहन बस-टैक्सी शुरू करने की घोषणा कर दी हो, लेकिन इससे जुड़ा ड्राइवर-कंडक्टर खुश नहीं है। उन्हें 68 दिन के लॉकडाउन के दौरान बस मालिकों द्वारा वेतन न देने और उनके परिवार के सामने आए आर्थिक संकट के पल याद आ रहे हैं। मलाल यह है कि सरकारी तंत्र के साथ जनप्रतिनिधियों ने आगे आकर उनकी मदद नहीं की।
25 मार्च 2020 से लागू लॉकडाउन से अभी तक बस-टैक्सी और ऑटो के परिवहन पर पूर्णत: रोक लगाकर रखी गई थी। सोमवार से लागू अनलॉक 1.0 में बस सेवा शुरू करने की राज्य सरकार ने घोषणा की है। इससे एक-दो दिन में जिले में बस सेवाएं शुरू हो जाएंगी और आम नागरिकों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही ड्राइवर, कंडक्टर समेत मैकेनिक वर्ग को फिर से रोजगार मिलने लगेगा।
इस पेशे से जुड़े अफसर बंटी लाला, अरुण टांडेकर, दिलीप पवार बताते हैं कि कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन ने उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है। पहले बस मालिक से वेतन मिल जाता था, बस परिवहन बंद होने से उन्होंने भी नजर फेर ली है। जाकिर, लक्ष्मण, इमरान, लक्ष्मी नारायण, चैतराम और मोईन भी बताते हैं कि लॉकडाउन में सरकारी मदद भी मिल जाती तो हाथ इतने तंग नहीं होते। परिवार के गुजारे का संकट खड़ा हो गया है। ये केवल उनका नहीं पूरे जिले की ड्राइवर-कंडक्टरी की बिरादरी का सवाल है।

मालिकों से नाराज

सरकारी घोषणा से अलग ड्राइवर-कंडक्टरों को यह शिकायत है कि मार्च से उनका मासिक वेतन तक बस-टैक्सी मालिकों ने रोक रखा है। ऐसे में ये कैसे अपने घर का गुजारा करते होंगे, समझा जा सकता है। ये लोग जनप्रतिनिधि और अधिकारियों को भी कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, अभी तक उनके घर में कोई राहत नहीं पहुंची है। उन्हें बस लॉकडाउन के ये जखम बार-बार याद आ रहे हैं।

जिले में पांच सौ से ज्यादा बस-टैक्सियां

जिले के अंदरूनी रूट और राज्य व अंतरराज्यीय बसों और टैक्सी को देखा जाए तो यह एक हजार से अधिक है। ऑटो को भी मिलाया जाए तो संख्या दो हजार से ज्यादा हो जाती है। इससे हजारों ड्राइवर-कंडक्टर जुड़े हैं।

प्रशासन को सुनाएंगे दुखड़ा

बस मालक-चालक संघ के अध्यक्ष रहीश खान ने बताया कि सरकारी घोषणा से तुरंत ड्राइवर-कंडक्टर को राहत नहीं मिलेगी, इसलिए वे चार जून को कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी व्यथा प्रशासन को सुनाएंगे।

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