Transport: नहीं चल पाएंगी सूत्र सेवा की बसें, अड़ गए बस ऑपरेटर

Transport: प्रशासन के आदेश पर भारी बस ऑपरेटरों की मांग, टैक्स माफी और किराया वृद्धि पर अड़े

By: prabha shankar

Published: 01 Jul 2020, 05:22 PM IST

छिंदवाड़ा/ माता-पिता, भाई-बहन समेत परिजन से मिलने का सपना मंगलवार को टूट गया जब सूत्र सेवा के ऑपरेटरों ने बस संचालन से इनकार कर दिया। इस पर प्रशासन के आदेश का दबाव भी काम नहीं आया। बस ऑपरेटर टैक्स माफी और किराया माफी पर अड़े रहे। इस दौरान यात्रियों को राज्य परिवहन सेवा की बसों की खूब याद आईं। ये बसें होतीं तो निजी बस ऑपरेटरों की मनमानी पर भारी पडकऱ लोगों को संकटकाल में भी सेवाएं देती। सरकारी नीतियों से ऐसा नहीं हो सका।
नगर निगम के अधीन सिटी बस ट्रांसपोर्ट कम्पनी में 27 बसें हैं। कोरोना लॉकडाउन के बाद से ये बसें बस स्टैण्ड और बर्मन की जमीन पर खड़ी हंै। इन बसों को राज्य सरकार द्वारा निजी बस ऑपरेटरों को लोन पर उपलब्ध कराया गया था। इसमें 40 प्रतिशत तक शासन की सब्सिडी है। शेष 60 फीसदी बस ऑपरेटरों को देना है। इसके चलते कलेक्टर के आदेश पर नगर निगम आयुक्त ने पत्र जारी कर बस ऑपरेटर कम्पनी को पत्र लिखकर एक जुलाई से बस शुरू करने के आदेश दिए थे। इस पत्र के जवाब में कम्पनी के कर्ताधर्ता मंथन करते रहे।
उनका कहना है कि राज्य शासन से तीन माह के टैक्स माफी, डीजल 80 रुपए लीटर तथा ड्राइवर-कंडक्टर्स की मांग के चलते तत्काल बस सेवा शुरू करना सम्भव नहीं है। इस बारे में निगम आयुक्त को भी अवगत करा दिया गया है। फिलहाल बस ऑपरेटर के निर्णय से आम नागरिकों का परिजन से मिलने का सपना टूट गया है। उन्होंने सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच खींचतान का हल न निकल पाने पर आक्रोश जताया है।

तेरह साल पहले बंद हो गई सपनि बसें
पुराने सपनि कर्मचारी बताते हैं कि वर्ष 2005 में आई बाबूलाल गौर सरकार द्वारा सडक़ परिवहन निगम को बंद करने का निर्णय लिया गया। वर्ष 2007 आते-आते सभी बसें डिपों में खड़ी हो गईं और इसका संचालन पूरी तरह बंद हो गया। छिंदवाड़ा में इन बसों की संख्या सौ के आसपास थी। पिछले साल 2019 में इन बसों के कबाड़ को नीलाम भी किया गया। कर्मचारियों के अनुसार ये सेवा चालू होती तो बिना घाटे के परवाह किए यात्रियों को पूरे नियम पालन के साथ गंतव्य तक पहुंचातीं।

निजी ऑपरेटर अड़े, 30 सितम्बर तक खड़ी रखेंगे बसें
छिंदवाड़ा बस ऑपरेटर एसोसिएशन की बैठक मंगलवार को बस स्टैण्ड में हुई। इसके बाद एसोसिएशन ने जिला परिवहन अधिकारी को पत्र लिखकर बताया कि वे जिले की सभी यात्री बसें एक जुलाई से 30 सितम्बर तक खड़ी रहेंगी। एसोसिएशन अध्यक्ष रोमी राय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश मिगलानी और सचिव जसपाल नैय्यर ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में यात्री बसों का संचालन मुश्किल है। वाहनों के खड़े होने से उनकी वित्तीय स्थिति भी दयनीय हो गई है। कई बस मालिकों का बीमा एवं वाहनों की फिटनेस अवधि भी समाप्त हो गई है। इस स्थिति में वे वाहनों की नॉनयूज के लिए निर्धारित फार्म-के नहीं भर सकते और ना ही अग्रिम कर भुगतान
कर पाएंगे।

बसें न मिलने पर चार हजार रुपए दे रहे किराया

बसों का संचालन शुरू न होने से जरूरतमंद लोगों को नागपुर तक चार हजार रुपए का किराया टैक्सी या स्पेशल वाहन में देना पड़ रहा है। इसी तरह सिवनी, जबलपुर, भोपाल और इंदौर का किराया भी एक हजार रुपए से लेकर दस हजार रुपए तक पहुंच गया है। जिन्हें इलाज कराने, मृत्यु, विवाह या फिर अपने परिजन से मिलना अनिवार्य है। उन्हें टैक्सी स्टैण्ड में पहुंचकर इसे देना पड़ता है। बसों के शुरू न होने की कीमत हर किसी को चुकानी पड़ रही है।

प्रयासरत हैं
सिटी बस संचालन के लिए ऑपरेटर एजेंसी से बात हुई है। तीन जुुलाई से बसें शुरू हो सकती हैं। इसके लिए नगर निगम प्रयासरत है।
-हिमांशु सिंह, आयुक्त नगर निगम

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