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छिंदवाड़ा

मध्य प्रदेश भर में लगातार पिछड़ रहे सीवर लाइन प्रोजेक्ट से परेशानी

अधूरे निर्माण की वजह से बारिश में आम लोगों को समस्या होगी। अतिरिक्त समय में भी कार्य पूरे होने की उम्मीद कम है।

छिंदवाड़ाJun 28, 2024 / 12:18 am

mantosh singh

अधूरे निर्माण की वजह से बारिश में आम लोगों को समस्या होगी। अतिरिक्त समय में भी कार्य पूरे होने की उम्मीद कम है।

अधूरे निर्माण की वजह से बारिश में आम लोगों को समस्या होगी। अतिरिक्त समय में भी कार्य पूरे होने की उम्मीद कम है।

छिंदवाड़ा नगर निगम क्षेत्र में सात साल से सीवर लाइन परियोजना पर चल रहा कार्य राज्य में हर कार्य में बरती जाने वाली ढिलाई का नमूना है। हर शहर में यह बड़ी समस्या बना हुआ है। छिंदवाड़ा की बात करें तो जुलाई 2017 में परियोजना की शुरुआत हुई थी। जून 2020 तक निर्माण कार्य पूरा करना था। चार साल की देरी होने के बावजूद अब भी सीवर लाइन का कार्य अधूरा है। 302 किलोमीटर पाइपलाइन डालनी थी। बाद में दूरी को घटाकर 284 किमी कर दिया गया। दूसरी बार 268 किमी पाइप डालने का फैसला किया गया। 10698 मेनहोल, 10250 प्रॉपर्टी चैंबर का निर्माण और 25500 घरों में कनेक्शन देना था।
बार-बार समय सीमा बढ़ाने के बाद भी कार्य पूरा नहीं हो पाया है। एक बार फिर निर्माण एजेंसी को अतिरिक्त समय दिया गया है। 30 सितंबर 2024 तक कार्य के पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन अत्यधिक धीमी गति को देखते हुए सितंबर तक कार्य पूरा होते नहीं दिख रहा है। परियोजना की देरी की मुख्य वजह कार्य में लापरवाही रही है। समय सीमा के अंदर कार्य को पूरा करने की कोशिश नहीं की गई है। सडक़ के बीच में गड्ढा खोदकर कई सप्ताह तक छोड़ दिया गया। गड्ढा भरने के बाद मरम्मत में देरी की गई। निर्माण एजेंसी संसाधन की कमी का रोना रोती रही। निर्माण में लेटलतीफी की वजह से परेशानी बढ़ती जा रही है। शहर में अब भी कई जगह गड्ढा खोदकर पाइपलाइन डालने का कार्य चल रहा है। नियम के अनुसार मरम्मत भी नहीं की जा रही है।
मानसून का आगमन हो चुका है। बारिश के दौरान समस्या और बढ़ जाएगी। सीवर लाइन के लिए बनाए गए गड्ढों में पानी भर जाएगा। टूटी हुई सडक़ों पर चलना दूभर होगा। ऐसे में हादसे की आशंका बनी रहेगी। बारिश की वजह से लक्ष्य हासिल करना मुश्किल लग रहा है। सीवर लाइन परियोजना की कछुआ चाल के लिए नगर निगम कम जिम्मेदार नहीं है। निर्माण एजेंसी को ठेका देने के बाद कार्य की बराबर निगरानी नहीं की गई। तय समय में लक्ष्य हासिल करने के लिए दबाव नहीं बनाया गया। जनता की परेशानियों की जगह निर्माण एजेंसी को अहमियत दी गई। इसकी वजह आसानी से समझी जा सकती है, लेकिन नगर निगम को अब कमर कसनी होगी। अगर नगर निगम ने अब भी प्राथमिकता तय नहीं की तो इस परियोजना में और विलंब होगा और जनता परेशानी झेलती रहेगी।

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