Two-wheelers: दिल का मरीज बना रहे दोपहिया वाहन

जल, वायु और मृदा प्रदूषण को लेकर लोग कुछ हद तक जागरूक है। इसके अलावा ध्वनि प्रदूषण भी है जिसे लेकर लोगों में जरा भी जागरुकता नहीं है।

छिंदवाड़ा. जल, वायु और मृदा प्रदूषण को लेकर लोग कुछ हद तक जागरूक है। इसके अलावा ध्वनि प्रदूषण भी है जिसे लेकर लोगों में जरा भी जागरुकता नहीं है। अन्य प्रदूषण की तरह यह भी खतरनाक साबित हो रहा है। आमतौर पर इसके नुकसान देरी से सामने आते हैं। इसलिए ध्वनि प्रदूषण को गम्भीरता से नहीं लिया जाता। सडक़ पर दौड़ते तेज आवाज, क्षमता से अधिक साउंड वाले हार्न और बाइक के साइलेंसर से पटाखे फोडऩे जैसी कर्कश आवाज वाले वाहन लोगों की जान के दुश्मन बन रहे।

लम्बे समय तक तेज या फिर कर्कश आवाज के सम्पर्क में रहने से लोग दिल के मरीज बन जाते हैं, कुछ इसी तरह के हालात अब जिले में भी बन रहे हैं। लोग अपने शौक के लिए वाहनों में ऐसे साइलेंसर और हार्न का इस्तेमाल कर रहे हैं जो दूसरों के लिए तकलीफ देह साबित हो रहे। कोलाहल अधिनियम तो बना है, लेकिन अपराध दर्ज होते नजर नहीं आ रहे। बाइक सवार खुलेआम सडक़ पर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे। पुलिस की कार्रवाई इसके लिए काफी नहीं होगी आम लोगों को भी विरोध के लिए सामने आना होगा। लगातार ऐसे वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही जो भविष्य के लिए नुकसानदेह है।

विशेषज्ञ की राय नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुधीर शुक्ला का कहना है कि 80 डेसीबल के साउंड में लगातार बने रहने से काम में मन नहीं लगेगा। चिड़चिड़ापन होना, ब्लड प्रेशर बढ़ जाना, दिल की धडकऩ बढऩे जैसी समस्याएं होना आम बात होती है। कई बार लोग दिल के मरीज बन जाते हैं। आम तौर पर पटाखे फोडऩे वाले वाहन की आवाज 120 डेसीबल तक होती है जो बहुत खतरनाक है। शोर के कारण कान में स्थाई नुकसान हो जाता है जैसे बहरा हो जाना, कम सुनाई देना आदि शामिल है। केवल पुलिस की कार्रवाई से काम नहीं बनेगा इसके लिए समाज की भागीदारी बहुत जरूरी है। लोगों को जागरूक करना होगा। ऐसे वाहन इस्तेमाल करने वालों को टोकना होगा।

यह है दर्दनाक आवाज शोर को मापने के लिए जिस इकाई का प्रयोग किया जाता है उसे डेसीबल कहा जाता है और जिस यंत्र से मापन किया जाता है उसे शोर मापक यंत्र कहा जाता है। कितने डेसीबल आवाज पर क्या नुकसान होता वह कुछ इस प्रकार है। डेसीबल 150 कान में असहनीय दर्द डेसीबल 140 दर्द की शुरुआत

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babanrao pathe Reporting
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