मानसून की आस में बूंद-बूंद को तरसे

मानसून की आस में बूंद-बूंद को तरसे
Water conservation in Chhindwara

Prabha Shankar Giri | Updated: 22 Jun 2019, 07:00:00 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

पानी को तरस रहे कोयलांचल के हालात इस वर्ष और खराब

छिंदवाड़ा. जिले में भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है ऊपर से मानसून भी दगा दे रहा है। वर्षों से पानी को तरस रहे कोयलांचल के हालात इस वर्ष और खराब दिख रहे हैं। पहले ही इस क्षेत्र में सप्ताह में एक दिन पानी लोगों को नसीब हो रहा है। लोग आस लगाए बैठे थे कि मानसून आने के बाद उन्हें कुछ राहत मिलेगी, लेकिन लेटलतीफी ने अब बूंद-बूंद के लिए तरसा दिया है। इस वर्ष प्री मानसून की गतिविधियां भी नहीं हुईं। जमीन में पानी सूखता चला जा रहा है। प्राकृतिक पानी से लोगों को आस थी कि जलसंकट कुछ हद तक दूर होगा, लेकिन बिगड़े पर्यावरण के कारण अनिश्चित मौसम के कारण पूरे कोयलांचल में सूखे जैसे हालात हो गए हैं। परासिया में पूरे जिले में सबसे कम सिर्फ 2.4 मिमी पानी इस वर्ष गिरा है। जुन्नारदेव में 6.2 मिमी बारिश हुई है। उमरेठ में 7.6 मिमी ही पानी बरसा है। पिछले साल जून के महीने में यहां 50 मिमी से ज्यादा बारिश हो गई थी। इस वर्ष इस क्षेत्र में खेतों में फसल कैसे पैदा होगी, किसानों के माथे पर यह चिंता सता रही है।

सौंसर-पांढुर्ना भी बेहाल
पिछले मानसून सीजन में सौंसर में अच्छी बारिश की शुरुआत हुई थी। पिछले जून में इस तारीख तक सौंसर में 174.2 मिमी पानी बरस चुका था, लेकिन इस बार सौंसर में सिर्फ 5.5 मिमी पानी बरसा है। पांढुर्ना में 32.2 मिमी बारिश हो चुकी है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं कही जा सकती। इनसे जुड़े मोहखेड़ में 7.2, बिछुआ में 12 मिमी वर्षा हुई है जो बहुत कम है। यह क्षेत्र संतरा और कपास के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन मौसम की मार इसके उत्पादन पर भी दिखेगी। तामिया अमरवाड़ा, हर्रई जैसे पहाड़ी और मैदानी इलाकों में पहले सबसे ज्यादा बारिश होती थी, लेकिन सूखे मैदान बन चुके जंगलों के कारण यहां पानी अब वैसा नहीं बरस रहा। तामिया में पिछले साल 95 मिमी बारिश जून के पहले बीस दिनों में हो गई थी इस बार सिर्फ 16 मिमी पानी गिरा है। अमरवाड़ा और हर्रई में भी हालात असामान्य ही हैं।

विभाग का अनुमान भी जा रहा गलत
मौसम विभाग का पूर्वानुमान भी गलत साबित हो रहा है। विभाग ने मंगलवार से शुक्रवार के बीच बादल रहने के साथ बारिश की सम्भावना बताई थी, लेकिन एक बूंद पानी भी चार दिन में नहीं बरसा। न घने बादल छा रहे हैं न इन दिनों में चलने वालीं तेज हवाएं दिख रही हैं जो अपने साथ बादलों को लाएं और स्थानीय स्तर पर बारिश का कुछ माहौल बनाएं। इस संबंध में मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मानसून को पश्चिम दिशा की तरफ से जो रफ्तार पकडऩी थी वह नही हो पा रहा। कुल मिलाकर मानसून कब आएगा और किस सूरत में आएगा इसका सिर्फ अनुमान ही लगाया जा रहा है। स्पष्ट रूप से कोई कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है।

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