इनकी लापरवाही पड़ी भारी, बूंद- बूंद का संकट

इनकी लापरवाही पड़ी भारी, बूंद- बूंद का संकट
Water crisis

Prabha Shankar Giri | Updated: 10 Jun 2019, 12:22:41 PM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

भरे होते ये स्टॉपडैम तो नहीं तरसते लोग

छिंदवाड़ा. तामिया के आगे देलाखारी समेत आसपास के इलाकों में एक बार स्टॉपडैम बन गया तो फिर कोई अधिकारी-कर्मचारी उनकी देख-रेख करने नहीं पहुंचता है। इससे कपूरनाला, लहगड़ुआ और सिंगोड़ी के स्टॉपडैम उपेक्षित पड़े हुए हैं। पिछली बारिश के समय भी इन स्टॉपडैम में पानी संग्रहित नहीं हो सका। जलसंसाधन, ग्राम वन समिति और पंचायत की उदासीनता से ग्रामीणजनों को पानी के लिए आसपास भटकना पड़ता है। क्षेत्रीय समाजसेवी और भाजपा मंत्री जितेन्द्र शाह ने इस पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।

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सिंगोड़ी : स्टॉपडैम में नहीं लगाया गेट
देलाखारी रेंज के अधीन ग्राम पंचायत सिंगोड़ी में ग्राम वन समिति ने स्टापडैम बनाया था। यहां गेट न लगाए जाने से पिछली बरसात का पानी संग्रहित नहीं हो पाया। इससे इस गर्मी में ग्रामीणजन हलाकान होते रहे। उनका कहना पड़ा कि गेट लग जाते तो पानी को ज्यादा समय तक चलाया जा सकता था। फिलहाल रेंजर ने इस पर ध्यान देने का आश्वासन दिया है।

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कपूरनाला : गेट की वॉल टूटी
तामिया के आगे बम्हनी रोड पर ग्राम पंचायत कपूरनाला में स्टापडैम बनाया गया है। इसके गेट की वॉल टूट जाने से पानी एकत्रित नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की है। इसके बावजूद जलसंसाधन विभाग के कर्मचारियों ने गम्भीरता से नहीं लिया है। इससे इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

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चाखला: गेट सीपेज होने पर मरम्मत शुरू
तामिया तहसील के ग्राम चाखला डैम में गेट सीपेज और सिंगोड़ी, परतला, दैय्यर तथा चाखला की नहर में पानी न मिलने की शिकायत की गई थी। जिस पर जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-कर्मचारियों ने पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है। इस डैम में नवम्बर-दिसम्बर में ही पानी खत्म हो जाता था। फिलहाल विभाग का दावा है कि जल्द ही इसकी मरम्मत पूर्ण कर ली जाएगी।


लहगड़ुआ: स्टापडैम में भरी मिट्टी
पिपरिया रोड के किनारे लहगड़ुआ के पास स्टापडैम बनाया गया है। पिछले कुछ साल से डैम में मिट्टी भर जाने से पानी कम संग्रहित हो पा रहा है। इसे देखते हुए क्षेत्रवासी लम्बे समय से स्टापडैम के गहरीकरण की मांग कर रहे हैं। कई बार तो ग्रामीण गहरीकरण की मंशा से डैम मिट्टी खोदकर स्वयं ले जाते हैं, जो तकनीकी दृष्टि से सही है।

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