वर्करों के पास नहीं है काम, फिर भी हर माह सवा करोड़ का भुगतान

वर्करों के पास नहीं है काम, फिर भी हर माह सवा करोड़ का भुगतान
Workers do not have work

Prabha Shankar Giri | Updated: 20 Aug 2019, 07:00:00 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

पेंच क्षेत्र की कई खदानें वर्षों से बंद, लगातार बढ़ रहा घाटा

छिंदवाड़ा/ परासिया. कोयलांचल में पेंच क्षेत्र का बढ़ता घाटा जहां परेशान करने वाला है वहीं पेंच क्षेत्र में सैकड़ों कामगार बिना काम के वेतन प्राप्त कर रहे हैं। इससे कोयलांचल का घाटा लगभग 430 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष हो गया है।
तीन अगस्त 2017 को भूमिगत गणपति खदान बंद की गई। इसका मेनपावर महादेवपुरी खदान को दे दिया गया। इसके बाद भी टाउनशिप के नाम पर लगभग 90 कामगार यहीं पर रखे गए हैं। विष्णुपुरी क्रमांक एक को 15 दिसम्बर 2017 को बंद कर दिया गया। यहां कार्यरत 332 कामगारों में 132 को विष्णुपुरी खदान क्र. 2 में लोन के रूप में शिफ्ट किया गया, जबकि शेष टाउनशिप के नाम पर वहीं रखे गए हैं।
इसी तरह इकलहरा-बडक़ुही ओपनकास्ट खदान लगभग दो वर्ष से बंद है। यहां न तो टाउनशिप है न ही उत्पादन। इसी वजह से यहां के 50 कर्मचारियों में से ज्यादातर के पास कोई काम नहीं है। एक अनुमान के अनुसार ऐसे कर्मचारियों पर ही प्रतिमाह सवा करोड़ रुपए वेतन एवं सुविधाओं के रूप में खर्च किया जा रहा है। प्रबंधन द्वारा बंद खदानों के कामगारों को प्रभावी रूप से अन्य खदानों में नियोजन नहीं किया गया। इसी वजह से यह स्थिति निर्मित हुई है। गौरतलब है कि बंद खदानों का मेनपावर जिन खदानों में शिफ्ट किया गया वह पहले से ही घाटे में है और मेनपावर सरप्लस है। अब इन खदानों में और अधिक कर्मचारियों के आ जाने के कारण घाटा और अधिक हो गया है।

क्या है टाउनशिप
खदान बंद होने के बाद भी रहवासी क्षेत्र बने रहते हैं। इन रहवासी क्षेत्रों में पानी, बिजली, इलाज जैसी सुविधाओं का संचालन टाउनशिप के अंतर्गत आता है। इन सुविधाओं के संचालन के लिए खदान बंद होने के बाद भी कुछ मेनपावर रिजर्व रखा जाता है। हालांकि पेंच क्षेत्र की बंद खदानों में टाउनशिप के नाम जितना मेनपावर रिजर्व रखा है वह जरूरत से कई गुना ज्यादा है।


जेसीसी की बैठक में हमने इस विषय को प्रबंधन के समक्ष उठाया था। कहा था कि पेंच की समस्त खदानों के मेनपावर की समीक्षा कर विस्तारपूर्वक जानकारी दी जाए। प्रबंधन खदानों में ठेका पद्वति से कार्य करा रहा है, जबकि स्थाई कर्मचारी मौजूद हैं। उनसे काम लिया जाना चाहिए। पेंच की खदानों में मेन पावर सरप्लस जैसी स्थिति नहीं है। हम श्रम शक्ति का उचित नियोजन करने के लिए प्रबंधन के साथ पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हंै।
- कुंवर सिंह, महामंत्री बीएमएस

प्रबंधन ठेका के माध्यम से खदानों में काम कराना चाहता है इसलिए स्थाई कर्मचारियों की जगह ठेका कर्मियों को लगाया जा रहा है। इसी की आड़ मेेंं मेनपावार सरप्लस बताकर वालेंटियर रिटायरमेंट अथवा अन्य स्कीम के माध्यम से कामगारों को हटाना प्रबंधन की नीति है। स्थाई कर्मचारियों के होने के बाद भी आउट सोर्सिंग करना खदानों के राष्ट्रीयकरण की मूल अवधारणा को नुकसान पहुंचाना है। इसका हम विरोध करते हैं।
-मनोज तिवारी, अध्यक्ष इंटक पेंच क्षेत्र

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